Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jun, 2026 11:36 AM

जयपुर। राजस्थान में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और यह अब एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) के तहत जारी जिला-वार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच...
जयपुर। राजस्थान में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और यह अब एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) के तहत जारी जिला-वार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्य में कुल 18,42,617 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले पांच वर्षों में लगभग 5 गुना से अधिक की बढ़ोतरी को दर्शाती है।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में जहां डॉग बाइट के 88,259 मामले सामने आए थे, वहीं यह संख्या बढ़कर वर्ष 2025-26 में 5,93,999 तक पहुंच गई। यानी इन वर्षों में मामलों में लगभग 573 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में हर साल औसतन 4 लाख से अधिक लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
एडिशनल हेल्थ डायरेक्टर डॉ. नरोत्तम शर्मा ने बताया कि डॉग बाइट एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। राज्य के पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि घायल व्यक्ति को तुरंत घाव को साफ कर एंटीसेप्टिक लगाना चाहिए और बिना देरी के नजदीकी अस्पताल में जाकर इलाज कराना चाहिए।
जिला स्तर के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में अलवर जिले में सबसे ज्यादा 47,910 मामले दर्ज हुए। इसके बाद श्रीगंगानगर में 38,331, बीकानेर में 35,796, डीग में 34,087, जयपुर में 33,595 और धौलपुर में 32,688 मामले सामने आए। जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और हनुमानगढ़ जैसे बड़े जिलों में भी हजारों की संख्या में डॉग बाइट केस दर्ज किए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन न लगने पर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, जो घातक साबित हो सकती है। ऐसे में यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि नगर निकायों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है।
लगातार बढ़ते मामलों ने आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण, नसबंदी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता, एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान और जन-जागरूकता की कमी जैसे मुद्दों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।