2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग, शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

Edited By Ishika Jain, Updated: 18 Jun, 2026 04:42 PM

dholpur teachers demand tet exemption for pre 2010 appointed educators

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रही बहस के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) की धौलपुर जिला इकाई ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन...

धौलपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रही बहस के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) की धौलपुर जिला इकाई ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा वर्ष 2010 में जारी की गई टीईटी संबंधी अधिसूचना और हाल के न्यायिक निर्णयों के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका मानना है कि इन परिस्थितियों का असर उन शिक्षकों पर भी पड़ सकता है, जिनकी नियुक्तियां टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले की गई थीं।

जिला अध्यक्ष देवेश प्रसाद शर्मा और जिला मंत्री पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय प्रभावी नियमों और निर्धारित पात्रताओं के अनुसार हुई थी। ऐसे में बाद में लागू किए गए मानकों को पूर्व नियुक्तियों पर लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

संगठन ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्षों से शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षक विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। इसलिए उनकी सेवाओं और भविष्य को लेकर किसी प्रकार की अनिश्चितता पैदा नहीं होनी चाहिए।

महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत प्रदान की जाए। साथ ही उनकी सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक अधिकारों को संरक्षित रखा जाए।

ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर संसद के माध्यम से कानूनी संशोधन कर इस विषय का स्थायी समाधान निकाला जाए। संगठन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति लागू करने की भी मांग उठाई, ताकि शिक्षकों के बीच व्याप्त भ्रम और असुरक्षा की स्थिति समाप्त हो सके।

महासंघ ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए जल्द उचित निर्णय लेगी।

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