धौलपुर पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद

Edited By Afjal Khan, Updated: 13 Feb, 2026 06:09 PM

dholpur pocso court awards life imprisonment to man convicted of raping minor

धौलपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जिसका अर्थ है कि दोषी जीवनभर जेल में रहेगा। इसके साथ ही उस पर 31,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

धौलपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जिसका अर्थ है कि दोषी जीवनभर जेल में रहेगा। इसके साथ ही उस पर 31,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अदालत ने राज्य की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।

2022 में दर्ज हुआ था मामला

विशिष्ट लोक अभियोजक संतोष मिश्रा के अनुसार, घटना को लेकर 26 नवंबर 2022 को महिला थाने में मामला दर्ज कराया गया था। शिकायत में आरोप था कि 16 वर्षीय नाबालिग के साथ मारपीट कर जबरन दुष्कर्म किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

परिजनों द्वारा उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को गंभीर देखते हुए आगे रेफर किया गया।

जांच और गिरफ्तारी

मेडिकल परीक्षण के बाद महिला थाना प्रभारी मंजू फौजदार ने अस्पताल में पीड़िता के बयान दर्ज किए। जांच की जिम्मेदारी सीओ सिटी सुरेश सांखला को सौंपी गई।

पुलिस ने अनुसंधान के दौरान साक्ष्य जुटाते हुए 8 दिसंबर 2022 को आरोपी को गिरफ्तार किया और न्यायालय में चालान पेश किया। आरोपी तब से न्यायिक हिरासत में था।

पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जयपुर स्थित Sawāi Mānsingh Hospital (एसएमएस अस्पताल) रेफर किया गया था, जहां उसके दो ऑपरेशन किए गए।

18 गवाहों की गवाही, दो दिन चली बहस

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 18 गवाह प्रस्तुत किए और संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित कराया। जांच से जुड़ी कुछ कमियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त आवेदन भी दाखिल किया गया।

दो दिन तक चली सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष पॉक्सो न्यायाधीश राजकुमार ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई।

कड़ा संदेश

अदालत के इस निर्णय को बाल अपराधों के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही, पीड़िता को आर्थिक सहायता देने का आदेश न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करता है।
 

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