Edited By Anil Jangid, Updated: 15 May, 2026 07:33 PM

जोधपुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 107.97 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जिसमें 3.25 रुपए की वृद्धि...
जोधपुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 107.97 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जिसमें 3.25 रुपए की वृद्धि हुई है। डीजल की कीमत भी 93.02 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने वाहन चालकों को चौंका दिया और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं।
श्रीगंगानगर जिले में तेल की कीमतें राज्य में सबसे अधिक हैं। ताजा बदलाव के बाद यहां पेट्रोल की कीमत 109.46 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94.74 रुपए प्रति लीटर हो गई है। स्थानीय वैट और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क के कारण यहां के लोग जयपुर की तुलना में लगभग 2 रुपए प्रति लीटर अधिक भुगतान कर रहे हैं।
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें मार्च 2024 से लगभग स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। यह पहली बार है जब लगभग दो साल बाद इतनी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में भी पेट्रोल 97.77 रुपए और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
डीजल की बढ़ी कीमत का असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ने वाला है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि लागत बढ़ने से अब सामान की ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है। इसके साथ ही तेल कंपनियों ने पंपों पर अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा तय कर दी है।
इस बढ़ोतरी ने मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर भी दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को अब ईंधन की बचत और वैकल्पिक विकल्पों पर ध्यान देना होगा।