मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नर्सिंग कोर्स पर संकट, 33 कश्मीरी छात्र सस्पेंड, 50 से ज्यादा का भविष्य खतरे में

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 12 Feb, 2026 06:04 PM

crisis on nursing course in mewar university

चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)। मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता से जुड़ा है।

चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)। मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता से जुड़ा है। अपनी डिग्री के भविष्य को लेकर प्रदर्शन कर रहे 33 कश्मीरी छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि जिस कोर्स में वे पढ़ाई कर रहे हैं, उसे न तो राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) से और न ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से आवश्यक मान्यता मिली है।

मार्च में फाइनल एग्जाम, लेकिन मान्यता अब तक नहीं
छात्र बाबर (2022 बैच) ने बताया कि वे फिलहाल फाइनल ईयर में हैं और मार्च में उनकी अंतिम परीक्षा प्रस्तावित है। लेकिन कोर्स की मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। छात्रों का कहना है कि यदि कोर्स को आधिकारिक मान्यता नहीं मिली, तो उनकी डिग्री व्यावहारिक रूप से बेकार हो जाएगी।

प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा
सरकारी या निजी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे
उच्च शिक्षा के अवसर भी प्रभावित होंगे
कोर्ट में आश्वासन, लेकिन ज़मीन पर कार्रवाई नहीं

छात्रों के अनुसार, वे 2024 में भी इसी मुद्दे पर विरोध कर चुके हैं। उस समय यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अदालत में लिखित आश्वासन दिया था कि यदि 4 दिसंबर 2024 तक मान्यता नहीं मिलती है, तो छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में उसी स्कॉलरशिप पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।

हालांकि 2026 आ चुका है और छात्रों का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस मामले में केवल 33 नहीं, बल्कि 50 से अधिक छात्र प्रभावित बताए जा रहे हैं।

धरना, पुलिस पहुंची मौके पर
छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन किया और केंद्र व राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। सूचना मिलते ही गंगरार पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को धरना स्थल से हटाया गया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच नोकझोंक भी हुई।

छात्रों की मांग
छात्र प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें हैं:
बीएससी नर्सिंग कोर्स को तत्काल मान्यता दिलाई जाए।
यदि मान्यता संभव नहीं है तो कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान में स्थानांतरित किया जाए।
सस्पेंड किए गए 33 छात्रों का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए।

फिलहाल पूरे मामले पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो दर्जनों छात्रों का करियर गंभीर संकट में पड़ सकता है।
 

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