Edited By Anil Jangid, Updated: 27 Jul, 2026 04:38 PM

सूरतगढ़। महिला से कथित दुर्व्यवहार के मामले में सूरतगढ़ के तत्कालीन थानाधिकारी दिनेश सहारण की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सूरतगढ़। महिला से कथित दुर्व्यवहार के मामले में सूरतगढ़ के तत्कालीन थानाधिकारी दिनेश सहारण की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सूरतगढ़ के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सूरतगढ़ शहर थाना पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने परिवाद संख्या 176/2026 पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया महिला से जुड़े संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। न्यायालय ने आदेश दिया कि कोर्ट का आदेश प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाए।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल ने अपने आदेश में पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों में कुछ विरोधाभास सामने आए हैं। पुलिस रिपोर्ट में वीआईपी पास जारी होने का उल्लेख किया गया था, जबकि आरटीआई से मिली जानकारी में कार्यक्रम के लिए किसी भी प्रकार के वीआईपी पास जारी नहीं होने की बात सामने आई। न्यायालय ने इस अंतर को महत्वपूर्ण तथ्य माना है।
कोर्ट ने कथित रूप से पीड़िता के बयानों पर किए गए हस्ताक्षरों की जांच के लिए एफएसएल परीक्षण कराने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की वास्तविकता सामने आ सके।
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 199 का भी उल्लेख किया। इस धारा के तहत लोक सेवक द्वारा अपने कानूनी कर्तव्य की जानबूझकर अवहेलना करने या संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज नहीं करने के मामले में कार्रवाई का प्रावधान है।
इसके साथ ही न्यायालय ने श्रीगंगानगर जिला पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच सूरतगढ़ वृत्त से अलग किसी आरपीएस स्तर के अधिकारी से कराई जाए। अदालत ने यह कदम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।
अब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर मामले की आगे की जांच की जाएगी। न्यायालय के आदेश के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।