पिपलोदी विद्यालय में फिर गूंजी बच्चों की आवाजें, वैकल्पिक भवन में हुआ पढ़ाई का पुनः शुभारंभ

Edited By Chandra Prakash, Updated: 07 Aug, 2025 07:59 PM

children s voices echoed again in piplodi school

पिपलोदी गांव में हृदयविदारक हादसे के बाद आज गांव में एक नई शुरुआत की गई। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पिपलोदी का संचालन गुरुवार से एक वैकल्पिक भवन में पुनः आरंभ हो गया, और बच्चे सहजता और प्रसन्नता के साथ विद्यालय लौटे।

झालावाड़, 7 अगस्त 2025 । पिपलोदी गांव में हृदयविदारक हादसे के बाद आज गांव में एक नई शुरुआत की गई। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पिपलोदी का संचालन गुरुवार से एक वैकल्पिक भवन में पुनः आरंभ हो गया, और बच्चे सहजता और प्रसन्नता के साथ विद्यालय लौटे।

जिला प्रशासन पहल लाई रंग
गौरतलब है कि विद्यालय भवन की छत गिरने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 7 मासूम बच्चों की मृत्यु हो गई थी और कई बच्चे घायल हुए थे। हादसे के बाद जिला प्रशासन ने जहां राहत, इलाज और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, वहीं बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा शीघ्र ही वैकल्पिक प्रबंध किए गए।

भावनात्मक पुनर्बलन के लिए विशेष प्रयास
जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के मन से हादसे का भय निकालने और उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक के अन्य स्कूलों से चार योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो न केवल पढ़ाई करवा रहे हैं, बल्कि गांव में घर-घर जाकर बच्चों और परिजनों से संवाद भी कर रहे हैं।

इन शिक्षकों का उद्देश्य है —"बच्चों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लाना, और उन्हें विश्वास दिलाना कि स्कूल अब फिर से सुरक्षित है, और शिक्षा का रास्ता कभी नहीं रुकना चाहिए।"

मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा ने जानकारी दी कि ग्रामवासियों की सहमति से स्थानीय भवन को वैकल्पिक विद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। इस भवन में रंग-रोगन, बिजली, पेयजल, शौचालय सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि बच्चों को एक सुरक्षित और सुलभ शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो सके।

विद्यालय लौटे बच्चे, दिखी सहजता और उत्साह
आज जब विद्यालय में पढ़ाई पुनः आरंभ हुई, तो बच्चों ने शिक्षकों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिजनों ने भी बच्चों को आत्मविश्वास से स्कूल भेजा और जिला प्रशासन का आभार जताया कि उन्होंने इतने कम समय में न केवल शिक्षा की निरंतरता बहाल की, बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखा।

जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इस पहल पर संतोष जताते हुए कहा कि हमारा प्रयास था कि बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार का व्यवधान न आए और वे भय से बाहर आकर दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी सतत ध्यान दिया जाए और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई कमी न रहे।

भविष्य की ओर एक सकारात्मक कदम
पिपलोदी गांव में शिक्षा की यह नई शुरुआत एक सांत्वना और विश्वास की प्रतीक है। यह दर्शाता है कि एकजुटता, सहानुभूति और कर्तव्यपरायणता के साथ किसी भी संकट से उबरा जा सकता है।

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