Edited By Anil Jangid, Updated: 06 May, 2026 02:57 PM

रणथंभौर: रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से भटककर आए चीते KP2 की लगातार मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का सबब बन गई है। करीब 20 दिन पहले राजस्थान पहुंचे इस चीते का मूवमेंट जंगलों के साथ-साथ आबादी क्षेत्रों में...
रणथंभौर: रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से भटककर आए चीते KP2 की लगातार मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का सबब बन गई है। करीब 20 दिन पहले राजस्थान पहुंचे इस चीते का मूवमेंट जंगलों के साथ-साथ आबादी क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है, जिससे ग्रामीण अपने घरों और खेतों में डर के कारण कैद हैं।
जानकारी के अनुसार, KP2 कभी रणथंभौर के जोन नंबर 8, 9 और 10 में विचरण करता दिखाई दे रहा है तो कभी कैलाशपुरी, दुमोदा और मोजीपुरा जैसे गांवों के पास पहुंच जाता है। हाल के दिनों में इसका अधिकतर मूवमेंट कैलाशपुरी गांव के पास अमरूद के बगीचों में देखा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि चीते की मौजूदगी उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। लोग खेतों और बगीचों में जाने से डर रहे हैं, जिससे सिंचाई और फसल की देखरेख का काम बाधित हो गया है। महिलाओं और बच्चों में भी भय का माहौल है, और कई बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं क्योंकि जिस रास्ते से वे स्कूल जाते हैं, वही क्षेत्र अब चीते KP2 के मूवमेंट में शामिल है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि चीते ने कुछ पालतू बकरियों का शिकार भी किया है। लगातार आबादी क्षेत्र में उसकी उपस्थिति के कारण ग्रामीणों ने वन विभाग से चीते को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग की है। हालांकि वन अधिकारियों और डीएफओ को शिकायतें दी गईं, लेकिन फिलहाल केवल आश्वासन ही मिला है।
KP2 सबसे पहले पालीघाट रेंज के अजीतपुरा गांव के पास देखा गया था और इसके बाद रणथंभौर के विभिन्न जोनों और आसपास के गांवों व कॉलोनियों में इसका मूवमेंट लगातार बना हुआ है।
वन विभाग और कुनो टीम लगातार इस चीते की मॉनिटरिंग कर रही है। हालांकि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन आबादी क्षेत्र में बार-बार चीते की दस्तक से ग्रामीणों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि लोग अकेले बाहर न जाएँ और बच्चों को स्कूल आने-जाने में सुरक्षा प्रदान करें।
यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता को फिर से उजागर करती है और दर्शाती है कि कैसे भटकते वन्यजीव आबादी क्षेत्र में भय और दहशत पैदा कर सकते हैं।