अफीम परख प्रक्रिया में काश्तकारों को मिली बड़ी राहत, अफीम तौल में अब 3 श्रेणी वर्गीकृत

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Apr, 2026 06:11 PM

big relief for farmers in opium testing process

प्रतापगढ़: प्रतापगढ़ जिले के काश्तकारों के लिए अफीम तौल प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। इंदिरा कॉलोनी स्थित अफीम तौल केंद्र पर पिछले 8 दिनों से लगातार तौल का काम चल रहा है, और अब नारकोटिक्स विभाग ने अफीम की...

प्रतापगढ़: प्रतापगढ़ जिले के काश्तकारों के लिए अफीम तौल प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। इंदिरा कॉलोनी स्थित अफीम तौल केंद्र पर पिछले 8 दिनों से लगातार तौल का काम चल रहा है, और अब नारकोटिक्स विभाग ने अफीम की परख प्रक्रिया में बदलाव करते हुए इसे तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर दिया है। यह कदम किसानों के लिए खुशी की खबर साबित हुआ है, क्योंकि अब उनकी उपज का मूल्यांकन और भुगतान अधिक पारदर्शी तरीके से होगा।

 

जिला अफीम अधिकारी एच एल वर्मा ने बताया कि इस बदलाव के बाद अब अफीम की क्लासिंग प्रणाली को स्टैंडर्ड, डब्ल्यूएम (WM) और सस्पेक्टेड के रूप में तीन मुख्य श्रेणियों में बांट दिया गया है। इसके जरिए विभाग का उद्देश्य अफीम तौल प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाना है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य मिल सके। इससे पूर्व में लागू विभिन्न श्रेणियों की तुलना में यह प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सुविधाजनक होगी।

 

वर्मा ने यह भी कहा कि तौल व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, ताकि काश्तकारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अफीम तौल केंद्र पर अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम लगातार निगरानी कर रही है, और विभाग ने सीसीटीवी कैमरों से भी तौल प्रक्रिया की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

 

अधिकारी ने काश्तकारों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और केवल विभाग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफीम में मॉर्फिन की अंतिम जांच रिपोर्ट फैक्ट्री स्तर से ही जारी की जाएगी और वही मान्य होगी।

 

इस बदलाव के साथ ही अफीम तौल केंद्र पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो रही है। अब काश्तकारों को अपनी उपज का तौल कराने में कोई परेशानी नहीं होगी, और उन्हें उनके उत्पाद की गुणवत्ता के अनुसार उचित भुगतान मिलेगा।

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