Edited By Anil Jangid, Updated: 28 Mar, 2026 05:33 PM

बारां: राजस्थान के हाड़ौती संभाग में स्थित बारां जिले का लहसुन अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। यहां के लहसुन की खुशबू और तीखे स्वाद की दुनियाभर में भारी मांग है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर...
बारां: राजस्थान के हाड़ौती संभाग में स्थित बारां जिले का लहसुन अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। यहां के लहसुन की खुशबू और तीखे स्वाद की दुनियाभर में भारी मांग है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर बारां कृषि उपज मंडी प्रशासन ने इस लहसुन को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) दिलाने के लिए औपचारिक आवेदन किया है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो बारां का लहसुन एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में उभर सकता है।
बारां जिले में इस साल करीब 60,000 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की खेती की गई है, और यह व्यापारिक फसल किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन चुकी है। वर्तमान में मंडी में लहसुन ₹8,000 से ₹14,000 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। किसानों का मानना है कि यदि लहसुन को जीआई टैग मिलता है, तो उन्हें निर्यात के रूप में बड़ा फायदा होगा और उनके उत्पाद की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी।
बारां के लहसुन की दो विशेषताएं इसे अन्य क्षेत्रों से अलग करती हैं – इसका तीखापन और स्वाद, जो इसे दुनिया भर में पसंद किया जाता है। इसके अलावा, यह लहसुन लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे यह निर्यात के लिए सबसे उपयुक्त बनता है। वर्तमान में बारां का लहसुन मुख्य रूप से खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। जीआई टैग मिलने के बाद, यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में इसकी मांग में वृद्धि की संभावना है।
बारां कृषि उपज मंडी के सचिव, हरिमोहन बेरवा ने बताया कि जीआई टैग के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है, लेकिन पूरी उम्मीद है कि बारां का लहसुन इस टैग से लाभान्वित होगा और एक ग्लोबल ब्रांड बनेगा।
किसानों का मानना है कि जीआई टैग से उनके उत्पाद का मूल्य बढ़ेगा और वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा में उभर सकते हैं।