Edited By Anil Jangid, Updated: 17 Apr, 2026 08:01 PM

जयपुर। बीती 10 अप्रैल की सुबह जब दुनिया गहरी नींद में थी, एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने सभी को हैरान कर दिया। करीब 4 बजे, एक बंजर जमीन पर सो रहे एक मजदूर परिवार पर एक अनियंत्रित ट्रोला चढ़ गया। यह परिवार, जो अनुसूचित जाति (भोपा समाज) से...
जयपुर। बीती 10 अप्रैल की सुबह जब दुनिया गहरी नींद में थी, एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने सभी को हैरान कर दिया। करीब 4 बजे, एक बंजर जमीन पर सो रहे एक मजदूर परिवार पर एक अनियंत्रित ट्रोला चढ़ गया। यह परिवार, जो अनुसूचित जाति (भोपा समाज) से ताल्लुक रखता था, मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता था। इस हादसे में मासूम सुनील (8 वर्ष) की माँ, मौसी और एक अन्य बच्ची की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। सुनील खुद गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता थी।
जे.के. लोन अस्पताल में सुनील का इलाज शुरू किया गया, लेकिन ऑपरेशन के लिए तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। परिवार की कठिन आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें इलाज में रुकावट का सामना करना पड़ा। इस समय पर अरुणोदय कल्याण फाउंडेशन (AKF) का हाथ सुनील के परिवार के साथ आया।
फाउंडेशन के निदेशक डॉ. कपिल देव को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत कार्यवाही की और अपने टीम के सदस्यों को रक्त की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। फाउंडेशन के सदस्य सुनील रैगर ने तत्काल अस्पताल पहुँचकर रक्त दान किया, जिससे सुनील का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया जा सका।
डॉ. कपिल देव ने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य पीड़ित मानवता की सेवा करना है। जब हमें सुनील और उसके परिवार के साथ हुई इस त्रासदी का पता चला, तो हमारी प्राथमिकता उसकी जान बचाना थी।"
फिलहाल, सुनील का इलाज जारी है और उसकी हालत में सुधार हो रहा है। इस मानवीय कार्य की समाज के विभिन्न वर्गों ने सराहना की है और अरुणोदय कल्याण फाउंडेशन की भूमिका को लेकर धन्यवाद व्यक्त किया है। फाउंडेशन ने इस मुश्किल घड़ी में एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है कि किस तरह एक समुदाय एकजुट होकर किसी की जान बचा सकता है।
इस हादसे ने यह भी सिद्ध किया कि समाज में मानवता और सहयोग की भावना जीवन के कठिन समय में कितनी महत्वपूर्ण होती है।