Edited By Payal Choudhary, Updated: 03 Feb, 2026 05:17 PM

राजस्थान की राजनीति में इस वक्त सवाल हार का नहीं, बल्कि भीतरघात का है। अंता उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी के ही पूर्व प्रत्याशी मोरपाल सुमन की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और उसी चिट्ठी ने भाजपा के भीतर सियासी भूचाल खड़ा कर दिया।
हार नहीं, भीतरघात पर बहस
राजस्थान की राजनीति में इस वक्त सवाल हार का नहीं, बल्कि भीतरघात का है। अंता उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी के ही पूर्व प्रत्याशी मोरपाल सुमन की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और उसी चिट्ठी ने भाजपा के भीतर सियासी भूचाल खड़ा कर दिया।
वायरल चिट्ठी में किस-किस पर आरोप
वायरल पत्र में मोरपाल सुमन ने अपनी हार के लिए टिकट देरी से मिलने को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन आरोप यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों और संगठन पर सीधे-सीधे सवाल खड़े किए। चिट्ठी में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla की टीम, बारां जिले के विधायक और यहां तक कि चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर तक को कटघरे में खड़ा किया गया।
भाजपा नेतृत्व की सख्ती
मामला सामने आने के बाद भाजपा ने सख्त रुख अपनाया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Madan Rathore ने वायरल चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए मोरपाल सुमन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
नोटिस में क्या कहा गया
नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि बिना तथ्य और बिना सबूत के लगाए गए आरोप पार्टी अनुशासन के खिलाफ हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह के सार्वजनिक आरोप भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन हैं।
तीन दिन की मोहलत
भाजपा की ओर से मोरपाल सुमन को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। अब पार्टी की अगली कार्रवाई उनके जवाब पर निर्भर करेगी।
नोटिस के बाद क्या अगला कदम
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला केवल नोटिस तक सीमित रहेगा या फिर भाजपा अपने ही पूर्व प्रत्याशी पर कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने जा रही है। फिलहाल तीन दिन का वक्त है, लेकिन राजस्थान की राजनीति में सियासत का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।