शिक्षा विभाग की अनदेखी से परेशान अधिशेष शिक्षक, न जाने कब समायोजित करेगी सरकार ?

Edited By Chandra Prakash, Updated: 07 Aug, 2024 08:40 PM

anger is brewing among teachers it may take the form of a movement

शिक्षा विभाग में वे शिक्षक जो स्कूलों में अधिशेष हैं, जो स्कूल क्रमोन्नत होने और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तन होने के बाद यह शिक्षक अधिशेष हो गए थे। यह शिक्षक 2 साल से अधिशेष चल रहे हैं। इन अधिशेष शिक्षकों का वेतन अन्य विद्यालयों के...

शिक्षकों में पनप रहा है रोष, ले सकता है आंदोलन का रूप
दो साल से अधिक समय से अधिशेष चल रहे हैं हजारों शिक्षक

अजमेर, 7 अगस्त 2024 (दिलीप शर्मा) । शिक्षा विभाग में वे शिक्षक जो स्कूलों में अधिशेष हैं, जो स्कूल क्रमोन्नत होने और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तन होने के बाद यह शिक्षक अधिशेष हो गए थे। यह शिक्षक 2 साल से अधिशेष चल रहे हैं। इन अधिशेष शिक्षकों का वेतन अन्य विद्यालयों के रिक्त पदों से आहरण हो रहा है, कभी यहां तो कभी वहां से वेतन के आदेश हो रहे है।

बता दें कि शिक्षक कितनी बार वेतन न मिलने से परेशान हो रहे हैं। यह शिक्षक काम कहीं ओर कर रहे हैं और वेतन किसी अन्य स्कूल से मिल रहा हैं। इन अधिशेष शिक्षकों की जॉइनिंग शाला दर्पण पर नहीं होने के कारण प्रोबेशन पूरा करने वाले शिक्षकों का नियमितिकरण नहीं हो पा रहा हैं और 9,18, 27 वर्ष सेवा पूर्ण होने वाले एसीपी, एमएसीपी भी ऑनलाइन अप्लाई नहीं कर पा रहे है। ना ही अन्य ऑनलाइन कार्य हो रहे है।

राजस्थान शिक्षक संघ राधाकृष्णन व राधाकृष्णन शिक्षिका सेना  शिक्षा मंत्री को पिछले दिनों ज्ञापन देकर यह मांग कर चुके हैं । कि इन अधिशेष शिक्षकों का रिक्त पदों पर समायोजन किया जाए। इस हेतु पहले अधिशेष शिक्षक क्षेत्र में पद रिक्त है तो उसी क्षेत्र के विद्यालय में, अगर पद नहीं तो पंचायत व फिर पंचायत समिति क्षेत्र में उनको समायोजित किया जाए। काउंसलिंग पद्धति के माध्यम से इन शिक्षकों का पदस्थापन किया जाए, मात्र तीन दिवस के भीतर यह सारे अधिशेष शिक्षक रिक्त पदों के विद्यालय में नियुक्त किए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग को इस विषय पर गंभीरता से सोच कर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। समायोजन ना होने से इन शिक्षकों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ऐसे में अब शिक्षकों में रोष बढ़ता जा रहा है ।

राजस्थान शिक्षक संघ राधाकृष्णन के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी का कहना है कि अगर विभाग द्वारा इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो शिक्षकों का रोष आंदोलन का रूप ले सकता है। एक और जहां अधिशेष शिक्षक बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ रिक्त पद होने से शिक्षण व्यवस्था बाधित हो रही है। विभाग को इस कार्य को प्राथमिकता से करना चाहिए।

राधाकृष्णन शिक्षिका सेना की प्रदेश संयोजिका सुनीता भाटी ने कहा कि अनेक शिक्षिकाएं ऐसी हैं, जिनका वेतन दूसरी जगह से उठ रहा है, ऐसे में दूसरे स्थान से वेतन उठाने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है और शिक्षिकाओं को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भाग दौड़ करनी पड़ती है। कई जगह पर उनका वेतन समय पर आहरित न करके अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। इस सबसे बचने का एकमात्र रास्ता है कि इन अधिशेष शिक्षकों को स्थाई पद पर समायोजित कर दिया जाए व इसके लिए काउंसलिंग व्यवस्था से आदेश करके इन्हें न्याय देना चाहिए।
 

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