Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jun, 2026 03:50 PM

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पंचायत राज और निकाय चुनावों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग उठी है। साथ ही, केंद्र सरकार से EWS आरक्षण की मौजूदा पात्रता शर्तों में संशोधन कर उन्हें अधिक व्यवहारिक...
झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पंचायत राज और निकाय चुनावों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग उठी है। साथ ही, केंद्र सरकार से EWS आरक्षण की मौजूदा पात्रता शर्तों में संशोधन कर उन्हें अधिक व्यवहारिक बनाने की अपील की गई है।
यह मांग ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के प्रतिनिधि Dharmendra Singh Rathore ने सर्किट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में लागू किया गया 10 प्रतिशत EWS आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन वर्तमान पात्रता नियमों के कारण इसका पूरा लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से भूमि स्वामित्व की 5 एकड़ सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह शर्त आज की आर्थिक परिस्थितियों में व्यवहारिक नहीं रह गई है। कृषि लागत में वृद्धि और आय में गिरावट के कारण कई किसान परिवार केवल भूमि के आधार पर इस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं, जबकि उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
राठौड़ ने आवास संबंधी शर्तों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियम संयुक्त परिवार व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, क्योंकि कई युवा पात्रता बनाए रखने के लिए अलग-अलग निवास करने को मजबूर हो रहे हैं। यह सामाजिक रूप से उचित नहीं है और इससे पारिवारिक संरचना पर भी असर पड़ रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार की आरक्षण नीतियों में असंगति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि कुछ समुदाय राज्य स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल हैं, जबकि केंद्र स्तर पर वे सामान्य वर्ग में आते हैं, जिसके कारण उन्हें EWS आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बैठक में यह भी मांग रखी गई कि राजस्थान में लागू किए गए व्यवहारिक EWS मॉडल को पूरे देश में अपनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल सके। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करना जरूरी है ताकि आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने EWS आरक्षण नीति में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।