सोने-चांदी में उथल-पुथल: राजस्थान के थेवा आभूषणों की अचानक देशभर से बढ़ी मांग, जानिए खासियत

Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Feb, 2026 04:41 PM

surge in demand for rajasthan thewa jewelry amid gold silver market

प्रतापगढ़। राजस्थान में सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच प्रतापगढ़ की थीवा कला से बने आभूषण लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरे हैं। सोने-चांदी के महंगे आभूषणों के बजाय थेवा आभूषणों की मांग में हाल के दिनों में अचानक वृद्धि...

प्रतापगढ़। राजस्थान में सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच प्रतापगढ़ की थीवा कला से बने आभूषण लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरे हैं। सोने-चांदी के महंगे आभूषणों के बजाय थेवा आभूषणों की मांग में हाल के दिनों में अचानक वृद्धि हुई है। थेवा कलाकारों के अनुसार, देशभर से आने वाले ऑर्डर में इतना इजाफा हुआ है कि कारीगर आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए दबाव महसूस कर रहे हैं।

 

थेवा कला में चांदी और सोने का अनुपात कम होता है, लेकिन श्रम लागत अधिक होती है। यह आभूषण पारंपरिक और अत्यंत आकर्षक होते हैं। कांच की सतह पर सोने की नक्काशी और बाहरी आवरण पर चांदी की चमक इस कला की विशिष्टता है। इस वजह से थेवा आभूषण महंगे सोने के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं।

 

प्रतापगढ़ के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थेवा कलाकार विष्णु सोनी ने बताया कि नई डिजाइन और मांग दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2004 में उन्हें यूनेस्को की ओर से South Asia में हस्तशिल्प उत्कृष्टता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। महेश राज सोनी को 2025 में पद्मश्री सम्मान मिला।

 

थेवा कला में गहनों के अलावा पूजा सामग्री और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी बनाई जाती हैं। हार, झुमके, कड़े, ब्रेसलेट, अंगूठी, पायजेब, चूड़ियां और सजावटी वस्तुएं इस कला के प्रमुख उत्पाद हैं। इस तरह थेवा कला राजस्थान के सांस्कृतिक और आर्थिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है।

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