19 मार्च से ब्रह्मांड की सत्ता में होगा फेरबदल, गुरु होंगे 'राजा' और मंगल संभालेंगे 'मंत्री' पद

Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Jan, 2026 12:40 PM

major cosmic shift from march 19 jupiter becomes king

जयपुर। हिंदू धर्म में नव वर्ष विक्रम संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। इस बार 19 मार्च 2026 से नव विक्रम संवत्सर 2083 आरंभ होगा। साथ ही इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि भी आरंभ होतीं हैं। इस नवसंवत्सर 2083 को रौद्र नामक संवत्सर के रूप में...

जयपुर। हिंदू धर्म में नव वर्ष विक्रम संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। इस बार 19 मार्च 2026 से नव विक्रम संवत्सर 2083 आरंभ होगा। साथ ही इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि भी आरंभ होतीं हैं। इस नवसंवत्सर 2083 को रौद्र नामक संवत्सर के रूप में जाना जाएगा। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि ब्रह्मांड का मंत्रिमंडल आगामी 19 मार्च से प्रभावी रहेगा। नए संवत्सर में राजा की गद्दी देवगुरु बृहस्पति को मिलने जा रही है। वहीं, चंद्रमा को तीन मंत्रालय मिलेंगे और मंगल को सिर्फ मंत्री के पद से संतोष करना पड़ेगा, जबकि सूर्य और शुक्र को कोई भी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। बृहस्पति के राजा बनने और वित्त, कृषि व पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मिलने के चलते नये व्यापारिक मार्ग खुलेंगे। बारिश तय समय पर होने से फसल अच्छी रहेगी। हालांकि साइबर ठगी की घटनाओं का ट्रेंड बदलेगा।

 

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार वर्ष 2026 में हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आगाज 19 मार्च, गुरुवार से होने जा रहा है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला 'गुड़ी पड़वा' इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होगा, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव 'राम नवमी' तक चलेगा। नव संवत्सर 2083 के शुरू होते ही ब्रह्मांडीय सत्ता और ग्रहों के मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा, जिसका सीधा प्रभाव जनजीवन और प्रकृति पर पड़ेगा।

 

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस साल गुरु, राहु-केतु राशि परिवर्तन करेंगे। ऐसे में हर राशि के जातकों के जीवन में शुभ या फिर अशुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके अलावा सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल, चंद्रमा अपनी अवधि के अनुसार राशि परिवर्तन करते रहेंगे। वर्ष 2026 की शुरुआत में सूर्य धनु राशि में, बृहस्पति मिथुन राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ तथा केतु सिंह राशि में होंगे। इसके अतिरिक्त मंगल भी धनु राशि में तथा शुक्र और बुध भी धनु राशि में होंगे। इसी वर्ष बृहस्पति 2 जून को मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर करेंगे और 31 अक्तूबर को कर्क से निकलकर सिंह राशि में चले जाएंगे। राहु 5 दिसंबर को मकर राशि में और केतु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।


रौद्र संवत्सर 
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा। यानी विक्रम संवत 2083 से प्रारंभ होगा रौद्र संवत्सर। यह देश और दुनिया में नरसंहार लेकर आएगा। मध्य एशिया में नरसंहार जारी है और अब यह दक्षिण एशिया में भी देखा जाएगा। इस दौरान मौसम में भारी बदलाव होगा और किसी बड़े भूकंप के आने या ज्वालामुखी फटने के संकेत भी मिलते हैं।

 

रौद्र संवत्सर मंत्रिमंडल 
राजा गुरु
मंत्री मंगल 
कृषिमंत्री (सश्येष) गुरु
खाद्य मंत्री (धान्येश) बुध
जलदाय मंत्री (मेघेश) चंद्रमा
उद्योग व खनिज मंत्री (रसेश) शनि
पेट्रोलियम मंत्री (नीरसेश) गुरु
वन व पर्यावरण मंत्री (फलेश) चंद्रमा
वित्तमंत्री(धनेश) गुरु
गृहमंत्री (दुर्गेश) चंद्रमा


भारत पर प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों की स्थिति और संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल के प्रभाव से भारत में विभिन्न घटनाएं घटित होंगी। भारत की राजनीति में बडे़ परिवर्तन देखने को मिलेंगे। भारत में पाकिस्तानी आतंकवादी हमला होने की संभावना प्रबल है। पंजाब, बंगाल, कश्मीर, ओड़िसा और पूर्वोत्तर राज्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है। भारत में जन आंदोलन हो सकता है जो भारत की राजनीति को अस्थिर करेगा।किसी घटना-दुर्घटना बड़ी जनहानि होने की संभावना है। भारत की सीमाओं पर तनाव बढ़ जाएगा। भारत में प्रदूषण अपने चरम पर होगा, मौसम और हवाओं से लोग परेशान रहेंगे। कृतिक आपदाएं  भूकंप, बाढ़,जल प्रलय की घटनाएं बढ़ जाएगी। इस साल भारत किसी बड़ी खोज या नई तकनीक से दुनिया का ध्यान खींच सकता है।  गुरु और मंगल का संयोग कुछ विशेष परिवर्तनकारी घटनाओं का रहेगा,साथ ही गुरु की अतिचारी गति भी बहुत प्रभावित करेगी। ज्योतिष शास्त्र में इस तरह का संयोग असामान्य परिस्थितियों और तीव्र घटनाक्रमों का घातक माना जाता है। इस वर्ष प्रकृति में भी असाधारण हलचल देखने को मिल सकती हैं प्राकृतिक घटनाएं, मौसम में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बदलाव लोगों को प्रभावित करेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष साइबर अपराधों में वृद्धि होने की संभावना है।


सतर्क रहने की आवश्यकता
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा को लेकर लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। वहीं दूसरी ओर समाज में धर्म और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों का विस्तार भी देखने को मिलेगा। धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक चिंतन की ओर लोगों का झुकाव बढ़ेगा। जो व्यक्ति धार्मिक और संयमी जीवन जीते हैं, उनके लिए यह वर्ष विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है सूर्य का प्रकोप अधिक रहेगा, जिससे तापमान में असामान्य वृद्धि हो सकती है इसके बावजूद किसानों के लिए यह वर्ष सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र में सुधार, फसल उत्पादन में वृद्धि और मेहनत का फल मिलने के योग बन रहे हैं। परिवर्तन, संघर्ष और आध्यात्मिक उन्नति का वर्ष होगा। यह समय संयम, सतर्कता और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए उन्नति और सफलता का संदेश लेकर आएगा।


दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2026 में भी चार ग्रहण देखने को मिलेंगे।  इनमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। वर्ष 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। यह एक कंकण सूर्य ग्रहण होगा। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 को लगेगा। यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होगा। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। 


सफलता और चुनौतियों का मिश्रण
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि राजा बृहस्पति होने के कारण देश मंर आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति होगी। विशेषकर कृषि और उत्पादन सेक्टर में रिकॉर्ड सफलता मिलने के योग हैं। हालांकि, मंगल के मंत्री होने से समाज में उग्रता, विवाद और रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। न्याय के देवता शनि की दृष्टि के कारण खनिज और तेल क्षेत्रों में कुछ प्रतिकूल प्रभाव दिख सकते हैं।

 

आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि चंद्रमा की स्थिति एक सफल मानसून की ओर संकेत कर रही है, लेकिन बुध के प्रभाव से महंगाई में तेजी आ सकती है। सोना और चांदी (स्वर्ण-रजत) की कीमतों में भारी उछाल और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। सरकारी राजकोष में वृद्धि होगी, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

राशियों के लिए शुभ 
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू नव वर्ष चार राशियों के लिए बेहद शुभ साबित हो सकता है। इस साल में गुरु और मंगल के प्रभाव के चलते मेष, वृश्चिक, धनु और मीन वालों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। इन राशियों को करियर के क्षेत्र में उन्नति मिलेगा और धन लाभ के भी योग बनेंगे। रोजगार के नए साधन इनको मिल सकता है। पदोन्नति और समाजिक स्तर पर आपका मान-सम्मान बढ़ने की भी संभावना है। राजनीति के क्षेत्र में हैं तो आपके शुभचिंतकों की संख्या बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन भी सुखमय रहे।

 

करें पूजा-पाठ और दान
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

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