पाली में अनोखी रिटायरमेंट पार्टी: टीचर ने 280 छात्रों को अपने हाथों से परोसा दाल-बाटी-चूरमा

Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Feb, 2026 06:25 PM

pali teacher celebrates retirement with students serves meal to 280 children

पाली। पाली जिले से एक भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने अपने रिटायरमेंट की खुशी अपने परिवार या दोस्तों के बजाय स्कूल के बच्चों के साथ मनाई। शिक्षक ने स्कूल परिसर में हलवाई बिठाकर 280 विद्यार्थियों के लिए...

पाली। पाली जिले से एक भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने अपने रिटायरमेंट की खुशी अपने परिवार या दोस्तों के बजाय स्कूल के बच्चों के साथ मनाई। शिक्षक ने स्कूल परिसर में हलवाई बिठाकर 280 विद्यार्थियों के लिए दाल-बाटी-चूरमा बनवाया और खुद अपने हाथों से बच्चों को भोजन परोसा। इस अनोखी रिटायरमेंट पार्टी ने शिक्षक-शिष्य के अटूट रिश्ते की मिसाल पेश की।

 

यह मामला पाली जिले के सोजत क्षेत्र के बासना गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है। अटपड़ा (सोजत) निवासी भेराराम प्रजापत पिछले करीब 10 वर्षों से इसी विद्यालय में कार्यरत हैं और कक्षा 11वीं व 12वीं के विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाते हैं। वे 25 अक्टूबर 1985 को तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग जैतारण के बेड़ कलां गांव में हुई थी। सेवा के दौरान उन्होंने बीए और वर्ष 1994 में बीएड की डिग्री प्राप्त की।

 

भेराराम प्रजापत 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मई माह में परीक्षाओं के बाद विद्यार्थी स्कूल में नहीं रहेंगे, इसलिए उन्होंने तय किया कि जिन बच्चों के साथ उन्होंने वर्षों बिताए हैं, उनके साथ ही रिटायरमेंट मनाया जाए। इसी सोच के साथ 9 फरवरी 2026 को उन्होंने स्कूल में पहली से 12वीं तक पढ़ने वाले सभी 280 विद्यार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था की।

 

इस मौके पर विद्यार्थियों ने भी अपने प्रिय शिक्षक के लिए खास तैयारी की। बच्चों ने आपस में पैसे इकट्ठा कर उन्हें ट्रॉली बैग भेंट किया। साथ ही माला और साफा पहनाकर उनसे आशीर्वाद लिया। यह दृश्य इतना भावुक था कि शिक्षक भेराराम प्रजापत की आंखें भर आईं। उन्होंने बच्चों को गले लगाते हुए कहा कि भले ही वे रिटायर हो रहे हों, लेकिन पढ़ाई में कभी जरूरत पड़े तो वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहेंगे।

 

यह आयोजन न केवल एक शिक्षक की विदाई का कार्यक्रम था, बल्कि यह गुरु-शिष्य के रिश्ते, समर्पण और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बन गया। इस अनोखी रिटायरमेंट पार्टी की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है और लोग इसे शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक बता रहे हैं।

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