करौली में युवा संसद का आयोजन, ‘आपातकाल के 50 साल’ विषय पर 60 से अधिक युवाओं ने रखे विचार

Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Feb, 2026 05:09 PM

youth parliament held in karauli

करौली। राजस्थान के करौली जिले स्थित राजकीय पीजी कॉलेज में जिला स्तरीय युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। इस कार्यक्रम में 60 से अधिक युवाओं ने भाग लेकर ‘आपातकाल के 50 साल: भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सबक’ विषय पर गंभीर और सारगर्भित...

करौली। राजस्थान के करौली जिले स्थित राजकीय पीजी कॉलेज में जिला स्तरीय युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। इस कार्यक्रम में 60 से अधिक युवाओं ने भाग लेकर ‘आपातकाल के 50 साल: भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सबक’ विषय पर गंभीर और सारगर्भित चर्चा की। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं के प्रति जागरूक करना था।

 

इस जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कुल 74 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 60 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से मंच पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने भारतीय संविधान, लोकतंत्र की मजबूती, नागरिक अधिकारों और आपातकाल के प्रभावों पर प्रभावशाली वक्तव्य दिए। कई वक्ताओं ने 25 जून 1975 को घोषित किए गए आपातकाल के राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया और इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

 

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के ऐतिहासिक संदर्भों पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि भारत में अब तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया है—पहला 1962 में Sino-Indian War के दौरान, दूसरा 1971 में Indo-Pakistani War of 1971 के समय और तीसरा 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर। 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे अधिक चर्चित और विवादित रहा है।

 

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिन्हें आगे Rajasthan Legislative Assembly में अपने विचार रखने का अवसर प्राप्त होगा। इससे युवाओं को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा।

 

कार्यक्रम का आयोजन ‘माय भारत’ और National Service Scheme (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना को सशक्त करना और उन्हें संवैधानिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाना है। कार्यक्रम ने युवाओं में जागरूकता और सक्रिय नागरिकता की भावना को नई दिशा दी।

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