राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर करौली में 8 प्रयोगों से अंधविश्वास का पर्दाफाश

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 Mar, 2026 04:40 PM

scientific experiments expose superstitions in karauli on national science day

करौली में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर 'मेरा युवा भारत, करौली' द्वारा वीणा मेमोरियल कॉलेज, पदेवा में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक करना था। कार्यक्रम में...

करौली: करौली में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर 'मेरा युवा भारत, करौली' द्वारा वीणा मेमोरियल कॉलेज, पदेवा में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक करना था। कार्यक्रम में विज्ञान को चमत्कारों से ऊपर रखते हुए तर्क और तथ्यों की जीत का संदेश दिया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और स्वागत समारोह से हुई। कॉलेज के प्राचार्य मनोज कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक सोच समाज को जागरूक और प्रगतिशील बनाती है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे तर्क आधारित दृष्टिकोण अपनाएं और अंधविश्वास के जाल में फंसने से बचें।

 

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में चार युवा दलों ने अपने गांवों से जुड़े अंधविश्वासों पर आधारित आठ वैज्ञानिक प्रयोग प्रस्तुत किए। इन प्रयोगों के माध्यम से तथाकथित चमत्कारों की वास्तविकता स्पष्ट की गई। उदाहरण के रूप में खून दिखाने वाले चमत्कार, नींबू से खून निकलने का भ्रम, नारियल के पानी से आग लगाने की चाल और बोतल में भूत बंद करने जैसी मान्यताओं को विज्ञान के आधार पर समझाया गया। प्रतिभागियों ने यह दिखाया कि ये सभी प्रयोग सामान्य रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं का परिणाम हैं, न कि किसी अलौकिक शक्ति का।

 

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें देशभक्ति गीतों पर नृत्य और गायन शामिल थे। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और विज्ञान से संबंधित पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। वैज्ञानिक प्रयोगों का संपादन और निरीक्षण प्रोफेसर डॉ. अनुराधा दुबे ने किया।

 

महाविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाना आवश्यक है। युवा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और अपनी सृजनात्मक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

 

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाओं के साथ हुआ और युवाओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और शोध के प्रति रुचि विकसित करने की दिशा में यह एक प्रेरक आयोजन साबित हुआ।

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