करौली में शुरू हो रहा राजसखी मेला, 16 फरवरी से 7 दिनों तक सजेगा बाजार

Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Feb, 2026 01:53 PM

rajsakhi mela to begin in karauli

करौली। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयां देने के लिए करौली में ‘राजसखी मेला 2026’ का आयोजन किया जा रहा है. जिला प्रशासन और राजीविकाके संयुक्त तत्वावधान में यह भव्य मेला 16 से 22 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

करौली। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयां देने के लिए करौली में ‘राजसखी मेला 2026’ का आयोजन किया जा रहा है. जिला प्रशासन और राजीविकाके संयुक्त तत्वावधान में यह भव्य मेला 16 से 22 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह मेला रोज सुबह 9:30 बजे से रात 9:30 बजे तक स्थानीय जैन नसिया ग्राउंड में आमजन के लिए खुला रहेगा.

 

इस मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य राजीविका परियोजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना के मुताबिक यह आयोजन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में हुनर होने के बावजूद महिलाओं को उचित बाजार नहीं मिल पाता, राजसखी मेला इसी कमी को दूर करेगा.

 

इस मेले में जिले के विभिन्न गांवों से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगी. इसमें मुख्य रूप से शामिल होंगे:

 

हस्तशिल्प और कपड़े: पारंपरिक कढ़ाई वाले कपड़े और सजावटी हस्तशिल्प
घरेलू सजावट: मिट्टी और लकड़ी से बने कलात्मक सामान.
खाद्य सामग्री: शुद्ध जैविक मसाले, घर के बने अचार, पापड़, बड़ियां और अन्य पारंपरिक व्यंजन.
इन उत्पादों की बिक्री से न केवल स्थानीय कला को पहचान मिलेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय में भी सीधा इजाफा होगा.

 

इस मेले के सफल और सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस आयोजन का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. मेले में आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

 

जिला कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस मेले में पहुँचें. उन्होंने कहा कि जब लोग इन महिलाओं के उत्पादों को खरीदेंगे, तो इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे सही मायनों में आत्मनिर्भर बन सकेंगी. यह मेला ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत, प्रतिभा और उनके अदम्य साहस को करीब से देखने का एक सुनहरा अवसर है.

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