सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय माहेश्वरी समाज का मूल मंत्र: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

Edited By Anil Jangid, Updated: 09 Jan, 2026 07:35 PM

lok sabha speaker om birla comment on maheshwari community

जोधपुर। जोधपुर में आयोजित तीन दिवसीय माहेश्वरी ग्लोबल एक्सपो के भव्य उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि माहेश्वरी समाज का मूल मंत्र “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” रहा है, जो समाज की विचारधारा और कार्यशैली का आधार है।...

जोधपुर। जोधपुर में आयोजित तीन दिवसीय माहेश्वरी ग्लोबल एक्सपो के भव्य उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि माहेश्वरी समाज का मूल मंत्र “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” रहा है, जो समाज की विचारधारा और कार्यशैली का आधार है। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज का इतिहास केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण तक समाज ने हर दौर में अपनी सशक्त भूमिका निभाई है।

 

ओम बिरला ने कहा कि भगवान महेश के आदर्शों से प्रेरित माहेश्वरी समाज सेवा, त्याग और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ता रहा है। जिस प्रकार भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विषपान किया, उसी प्रकार समाज भी जनकल्याण के लिए सदैव तत्पर रहा है। उन्होंने कहा कि संख्या में भले ही समाज छोटा हो, लेकिन उसका सामाजिक, आर्थिक और नैतिक प्रभाव अत्यंत व्यापक है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज जब भारत “विकसित भारत” के संकल्प के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में समाज के युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। युवाओं को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्रों में नेतृत्व करते हुए राष्ट्र के विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि आज का समय देश के लिए बलिदान का नहीं, बल्कि परिश्रम, नवाचार और जिम्मेदारी का है।

 

उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि देश और विदेशों में बसे माहेश्वरी समाज के युवा चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग और तकनीक जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और समाज के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले समाजजन भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और वैश्विक अनुभवों के माध्यम से भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं।

 

ओम बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि माहेश्वरी ग्लोबल एक्सपो केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक सरोकारों, नवाचार और राष्ट्र निर्माण पर सकारात्मक मंथन का मंच बनेगा। उन्होंने कहा कि जब समाज नैतिकता, समर्पण और नए विचारों के साथ आगे बढ़ेगा, तभी भारत सामूहिक शक्ति के रूप में विश्व पटल पर अग्रणी बनेगा।

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