हाईकोर्ट प्रशासन के फैसलों पर वकीलों का मोर्चा: नाइट कोर्ट और वर्किंग-डे के विरोध में 5 जनवरी को कार्य बहिष्कार!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 04 Jan, 2026 04:11 PM

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जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन के हालिया फैसलों के खिलाफ वकीलों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। हाईकोर्ट में महीने के दो शनिवार को वर्किंग-डे घोषित करने और नाइट कोर्ट यानी रात्रिकालीन अदालत शुरू करने के निर्णय को लेकर वकीलों में गहरा असंतोष देखा...

जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन के हालिया फैसलों के खिलाफ वकीलों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। हाईकोर्ट में महीने के दो शनिवार को वर्किंग-डे घोषित करने और नाइट कोर्ट यानी रात्रिकालीन अदालत शुरू करने के निर्णय को लेकर वकीलों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। इसी के विरोध में 5 जनवरी, सोमवार को जोधपुर स्थित हाईकोर्ट मुख्यपीठ सहित प्रदेश के सभी अधीनस्थ न्यायालयों में वकील न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे।

यह निर्णय शनिवार को जोधपुर में आयोजित राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया और प्रशासनिक फैसलों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई।

वकीलों का कहना है कि जब जिला मुख्यालयों पर रेवेन्यू कोर्ट, एडीएम, एसडीएम और अन्य अधिकरण सप्ताह में केवल पांच दिन कार्य करते हैं, तो अधीनस्थ न्यायालयों में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू करना व्यावहारिक नहीं है। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि नाइट कोर्ट और अतिरिक्त कार्यदिवस से न केवल कार्यभार बढ़ेगा, बल्कि इससे वकीलों के स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

बैठक में यह भी कहा गया कि न्यायिक प्रणाली में सुधार आवश्यक है, लेकिन ऐसे फैसले बिना व्यापक विमर्श और जमीनी हकीकत को समझे लागू करना उचित नहीं है। वकीलों ने इन निर्णयों को अव्यवहारिक बताते हुए हाईकोर्ट प्रशासन से पुनर्विचार की मांग की है।

हालांकि वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेंगे। बैठक में तय किया गया कि दोनों एसोसिएशन का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल जयपुर जाकर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा और अपनी आपत्तियों तथा मांगों को औपचारिक रूप से उनके समक्ष रखेगा। इस बातचीत के बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।

एसोसिएशन ने सभी सदस्यों को यह भी निर्देश दिए हैं कि कोई भी वकील अपने स्तर पर अलग से कोई कदम न उठाए, ताकि विरोध के दौरान न्यायपालिका की गरिमा, अनुशासन और संगठनात्मक एकता बनी रहे। अब सबकी नजरें प्रशासन और वकीलों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद का समाधान निकल सके।

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