Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Feb, 2026 01:52 PM

जयपुर। ड्रग तस्करों ने नशे की सप्लाई के लिए ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। अब तक तस्करी के मामले ट्रकों, कंटेनरों या मोडिफाइड वाहनों में छुपाकर किए जाते थे, लेकिन इस बार निजी बसों में पार्सल के नाम पर हरी मिर्च के...
जोधपुर। ड्रग तस्करों ने नशे की सप्लाई के लिए ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। अब तक तस्करी के मामले ट्रकों, कंटेनरों या मोडिफाइड वाहनों में छुपाकर किए जाते थे, लेकिन इस बार निजी बसों में पार्सल के नाम पर हरी मिर्च के भीतर ड्रग्स भरकर भेजी जा रही थी। यह चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक बस चालक को पार्सल में कुछ गड़बड़ नजर आई और उसने सतर्कता दिखाते हुए जांच की।
सूत्रों के अनुसार, यह पार्सल जोधपुर से हैदराबाद भेजा जा रहा था। ऊपर से देखने पर यह पूरी तरह मथानिया और सोयला क्षेत्र की मशहूर हरी मिर्च से भरा हुआ था, लेकिन जब ड्राइवर ने कुछ मिर्चों में कटे हुए निशान देखे तो उसे शक हुआ। उसने मिर्चों को खोलकर देखा तो अंदर चमकीले पेपर में लिपटी एमडी ड्रग्स और स्मैक मिली। बताया जा रहा है कि एक मिर्च के अंदर छिपी ड्रग्स की कीमत करीब 5 हजार रुपये तक है।
ड्राइवर ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया और तुरंत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को सूचना दी। सूचना मिलते ही एनसीबी हरकत में आ गई और इस नए तस्करी पैटर्न को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई। अधिकारियों के अनुसार, निजी बसों के जरिए पार्सल के रूप में ड्रग्स सप्लाई की सूचनाएं पहले भी मिलती रही हैं, लेकिन सब्जियों के अंदर इस तरह ड्रग्स छुपाने का यह पहला मामला है।
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया कि इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए “ऑपरेशन त्रिनेत्र” के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब मथानिया और सोयला क्षेत्र से होने वाली पार्सल गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बस स्टैंड, पार्सल एजेंसियों और निजी ट्रांसपोर्ट वाहनों की भी जांच बढ़ा दी गई है।
एनसीबी ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को संदिग्ध गतिविधि दिखे तो वह हेल्पलाइन “मानस 1933” पर सूचना दे सकता है। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई समाज और युवाओं को बचाने के लिए बेहद जरूरी है।