Edited By Payal Choudhary, Updated: 09 Apr, 2026 01:38 PM

राजस्थान के झुंझुनूं में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो) इसरार खोखर द्वारा सुनाया गया, जिसमें मामले की...
राजस्थान के झुंझुनूं में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो) इसरार खोखर द्वारा सुनाया गया, जिसमें मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
न्यायालय ने आरोपी कृष्ण कुमार को दोषी ठहराते हुए 20 साल की कठोर सजा सुनाई। इसके साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत कुल 1 लाख 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी 50 हजार रुपये का जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त तीन माह का कारावास भुगतना होगा।
मामले के अनुसार, यह घटना अगस्त 2023 की है, जब पीड़िता बाजार जाने के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे जबरन बाइक पर बैठाया और बाजार छोड़ने का झांसा देकर सुनसान खेत में ले गया। वहां उसने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपी ने उसी महीने दोबारा पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। इस पूरे मामले की शिकायत 9 अगस्त 2023 को दर्ज करवाई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाए।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे विशिष्ट लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह भाम्बू ने अदालत के समक्ष मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने 16 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए और 55 महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए, जिससे आरोपों को प्रमाणित किया जा सका।
लोक अभियोजक ने अदालत से मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। अदालत ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया और सख्त सजा सुनाई।
इस फैसले को न्याय व्यवस्था की दृढ़ता का उदाहरण माना जा रहा है, जहां नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ा रुख अपनाया जा रहा है। विशेष रूप से POCSO Act के तहत ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों में कानून का डर बना रहे।
यह मामला समाज के लिए भी एक गंभीर संदेश देता है कि नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार का अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी जरूरी है कि समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
कुल मिलाकर, झुंझुनूं की यह घटना न्यायिक व्यवस्था की सख्ती और संवेदनशीलता को दर्शाती है, जहां गंभीर अपराधों में दोषियों को कड़ी सजा देकर समाज में एक मजबूत संदेश दिया गया है।