Edited By Payal Choudhary, Updated: 22 Mar, 2026 04:38 PM

किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें फसल पंजीकरण के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होने या ई-मित्र केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें फसल पंजीकरण के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होने या ई-मित्र केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। सहकारिता विभाग ने RAJFED के माध्यम से एक विशेष QR कोड आधारित सिस्टम शुरू किया है, जिससे किसान घर बैठे मोबाइल से ही अपना रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।
इस नई व्यवस्था के तहत किसान अपने स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन कर सीधे आवेदन कर पाएंगे। पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
20 मार्च से शुरू हुई ऑनलाइन प्रक्रिया
सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरसों और चना खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 20 मार्च से शुरू कर दी गई है।
इस बार तकनीक के उपयोग के साथ किसानों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
अब 40 क्विंटल तक बेच सकेंगे सरसों
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए खरीद सीमा में बड़ा इजाफा किया है—
- पहले: अधिकतम 25 क्विंटल
- अब: बढ़ाकर 40 क्विंटल
इस फैसले से छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा सरकारी रेट पर बेचने का अवसर मिलेगा।
1 अप्रैल से शुरू होगी खरीद प्रक्रिया
फसल खरीद की भौतिक प्रक्रिया 1 अप्रैल से जिले के 21 चयनित केंद्रों पर शुरू होगी, जो करीब 60 दिनों तक जारी रहेगी।
किसानों की सुविधा के लिए प्रमुख मंडियों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों को खरीद केंद्र बनाया गया है।
MSP से किसानों को फायदा
इस बार बाजार और MSP के बीच अंतर किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है—
- चना (Chana)
- बाजार भाव: ~5100 रु./क्विंटल
- MSP: 5875 रु./क्विंटल
- सरसों (Mustard)
- MSP: 6200 रु./क्विंटल
- बाजार भाव: ~6350 रु./क्विंटल
ऐसे में किसान अपनी सुविधा के अनुसार मंडी या सरकारी केंद्र का विकल्प चुन सकते हैं।
इन केंद्रों पर होगी खरीद
झुंझुनूं जिले में 21 स्थानों पर तुलाई की व्यवस्था की गई है, जिनमें प्रमुख केंद्र शामिल हैं—
झुंझुनूं, उदयपुरवाटी, सूरजगढ़, चिड़ावा, पिलानी, डूंडलोद सहित कई ग्राम सेवा सहकारी समितियां।
किसानों की मदद के लिए RAJFED का टोल-फ्री नंबर 1800-180-6001 भी जारी किया गया है।
किसानों के लिए बड़ा बदलाव
यह नई व्यवस्था किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है—
- समय की बचत
- पारदर्शी प्रक्रिया
- फर्जीवाड़े पर रोक
- सीधे MSP का लाभ
डिजिटल सिस्टम के जरिए अब खेती और सरकारी योजनाओं के बीच की दूरी भी कम हो रही है।