झुंझुनूं के 5 गांव बनेंगे ‘आयुष्मान आदर्श ग्राम’, आयुर्वेद अस्पतालों में होगी BP, शुगर और एनीमिया की जांच

Edited By Payal Choudhary, Updated: 06 Mar, 2026 05:34 PM

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राजस्थान के झुंझुनूं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के पांच गांवों को ‘आयुष्मान आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को...

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के पांच गांवों को ‘आयुष्मान आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को निरोगी बनाना और गांव स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत इन चयनित गांवों के आयुर्वेदिक अस्पतालों में अब रक्तचाप (BP), मधुमेह (शुगर) और एनीमिया जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी की जाएंगी। इससे ग्रामीणों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए शहरों के बड़े अस्पतालों या एलोपैथिक केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

गांवों में ही मिलेगी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा

आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। अब इन गांवों में रहने वाले लोगों को छोटी-बड़ी बीमारियों की जांच और उपचार के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आयुर्वेद विभाग के अनुसार गांवों के आयुर्वेदिक अस्पतालों में नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच हो सकेगी।

इस पहल से खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।

आयुर्वेद और आधुनिक जांच का संयोजन

आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र स्वामी के अनुसार इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक जांच सुविधाओं के साथ जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि इससे हर नागरिक का विस्तृत हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया जाएगा, जिससे किसी भी बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सकेगी।

यदि समय रहते बीमारी का पता चल जाए तो इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचाव संभव हो जाता है।

बजट घोषणा 2025-26 में चयनित हुए गांव

राज्य सरकार की बजट घोषणा 2025-26 के तहत झुंझुनूं जिले के पांच गांवों को इस मॉडल प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।

पहले सूची में शामिल बाडलवासा गांव अब नगरीय निकाय में शामिल हो चुका है, इसलिए उसकी जगह भड़ौंदा खुर्द का नाम प्रस्तावित किया गया है।

चयनित गांव

  • छापोली

  • दुमोली खुर्द

  • भाटीवाड़

  • बिलवा

  • भड़ौंदा खुर्द (प्रस्तावित)

इन गांवों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

आयुर्वेद अस्पतालों में मिलेंगी नई सुविधाएं

आमतौर पर आयुर्वेदिक अस्पतालों को केवल काढ़ा और जड़ी-बूटियों तक सीमित माना जाता रहा है, लेकिन इस योजना के तहत इनके दायरे को बढ़ाया जा रहा है।

अब इन अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

रक्तचाप (Blood Pressure) जांच
गांवों में हाई बीपी के मरीजों की पहचान के लिए नियमित जांच की जाएगी।

मधुमेह (Diabetes) जांच
शुगर लेवल की त्वरित जांच की जाएगी ताकि मधुमेह के मरीजों का समय पर इलाज शुरू किया जा सके।

रक्ताल्पता (Anemia) जांच
महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी की जांच की जाएगी और आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से उपचार दिया जाएगा।

प्रकृति परीक्षण
हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति यानी वात, पित्त और कफ के आधार पर स्वास्थ्य सलाह दी जाएगी।

18 मानकों पर होगा गांवों का मूल्यांकन

किसी भी गांव को ‘आयुष्मान आदर्श ग्राम’ का दर्जा तभी मिलेगा जब वह 18 निर्धारित स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतरेगा।

इन मानकों के आधार पर पूरे गांव का विस्तृत स्वास्थ्य आकलन किया जाएगा और लोगों का हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया जाएगा।

प्रमुख मानक

बीमारी मुक्त पंचायत
टीबी, मीजल्स और रूबेला जैसी बीमारियों से 100 प्रतिशत मुक्ति का लक्ष्य।

मातृ-शिशु कल्याण
सभी गर्भवती महिलाओं की अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी और बच्चों का पूर्ण टीकाकरण।

नशा मुक्ति अभियान
गांव को पूरी तरह तंबाकू और अन्य नशों से मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान।

बुजुर्गों की देखभाल
60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का उपचार।

स्वास्थ्य जागरूकता
लोगों को ऋतुचर्या यानी मौसम के अनुसार जीवनशैली अपनाने और औषधीय पौधों के रोपण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ा कदम

आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बीमारियों की समय पर पहचान संभव होगी, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हर नागरिक को बेहतर इलाज मिल सके।

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