झालावाड़ में ‘आभा आईडी’ अभियान की शुरुआत: डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से इलाज होगा आसान

Edited By Payal Choudhary, Updated: 06 Mar, 2026 05:51 PM

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राजस्थान के झालावाड़ जिले में आमजन को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ‘झालावाड़ आभा आईडी अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत जिलेभर में लोगों को आभा आईडी (Ayushman Bharat Health Account) के बारे में जागरूक किया जा रहा है,...

राजस्थान के झालावाड़ जिले में आमजन को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ‘झालावाड़ आभा आईडी अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत जिलेभर में लोगों को आभा आईडी (Ayushman Bharat Health Account) के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि मरीजों का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सके।

इसी अभियान के तहत पीएचसी खंडिया में एक विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का संचालन डॉ. शुभम पाटीदार ने डॉ. श्रीजल नंदवाना के सहयोग से किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई कर्मचारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

स्वास्थ्य कर्मियों ने लिया सक्रिय भाग

इस जागरूकता कार्यशाला में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्सिंग ऑफिसर, कंप्यूटर ऑपरेटर और खंडिया विद्यालय की प्राचार्य अंजुम आरा ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य यह था कि स्वास्थ्य से जुड़े सभी कर्मचारी पहले इस योजना को समझें और फिर गांव-गांव जाकर लोगों को इसके बारे में जागरूक करें।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आभा आईडी से जुड़ते हैं तो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सरल और व्यवस्थित हो सकेंगी।

क्या है आभा आईडी?

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि आभा आईडी एक 14 अंकों की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या है, जिसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जारी किया जाता है।

इस आईडी के माध्यम से किसी भी मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।

इसमें डॉक्टर की पर्ची, जांच रिपोर्ट, दवाइयों का विवरण और इलाज से संबंधित अन्य जानकारी शामिल होती है। इससे मरीज को हर बार अस्पताल में पुरानी रिपोर्ट या पर्चियां साथ लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

डिजिटल रिकॉर्ड से होगा इलाज आसान

विशेषज्ञों ने बताया कि आभा आईडी बनने के बाद मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहता है। इससे डॉक्टर को मरीज की पिछली बीमारी और इलाज की जानकारी तुरंत मिल जाती है।

इससे इलाज की प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाती है। साथ ही अस्पताल में पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइनों में लगने की जरूरत भी कम हो जाती है।

यदि किसी मरीज की पर्ची या जांच रिपोर्ट खो जाती है, तब भी आभा आईडी के जरिए उसका पूरा रिकॉर्ड दोबारा प्राप्त किया जा सकता है।

घर बैठे डॉक्टर से ले सकेंगे सलाह

आभा आईडी के माध्यम से मरीज टेली-कंसल्टेशन सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं।

इस सुविधा के जरिए मरीज घर बैठे ही डॉक्टर से ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलेगी, जिन्हें अक्सर इलाज के लिए शहरों तक जाना पड़ता है।

आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया समझाई

कार्यशाला के दौरान लोगों को आभा आईडी बनाने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि आभा आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी है।

इसके माध्यम से यह आईडी सरकारी पोर्टल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर कुछ ही मिनटों में निःशुल्क बनाई जा सकती है।

आधार कार्ड की तरह आभा आईडी का प्रिंट भी निकाला जा सकता है, जिससे जरूरत पड़ने पर आसानी से इसका उपयोग किया जा सके।

जागरूकता पोस्टर का विमोचन

कार्यशाला के दौरान आभा आईडी जागरूकता पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर लोगों को अभियान से जोड़ने के लिए विशेष नारे भी दिए गए।

अस्पताल का काम आसान, आभा आईडी हर इंसान” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

हर नागरिक को जोड़ने का लक्ष्य

जिला स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि झालावाड़ जिले का हर नागरिक आभा आईडी बनवाकर डिजिटल हेल्थ सिस्टम से जुड़े।

सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा तो भविष्य में इलाज की प्रक्रिया और भी तेज, सुरक्षित और आसान हो जाएगी।

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