राजस्थान में इंडस्ट्री पर संकट: फैक्ट्रियां बंद, 1000 करोड़ के ऑर्डर अटके; 2 लाख मजदूरों पर रोजी-रोटी का खतरा!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 12 Apr, 2026 12:06 PM

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राजस्थान में उद्योगों पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण राज्य के मार्बल, ग्रेनाइट और टेक्सटाइल सेक्टर पर गंभीर असर पड़ा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं, जबकि हजारों...

राजस्थान में उद्योगों पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण राज्य के मार्बल, ग्रेनाइट और टेक्सटाइल सेक्टर पर गंभीर असर पड़ा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं, जबकि हजारों करोड़ रुपए के ऑर्डर अटक गए हैं और लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर रेड सी और हॉर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है, जहां उत्पादन घट गया है और लागत तेजी से बढ़ गई है।

चित्तौड़गढ़: मार्बल उद्योग आधा रह गया

चित्तौड़गढ़ की मार्बल इंडस्ट्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यहां उत्पादन में करीब 50% की गिरावट आई है।

  • पहले 24 घंटे चलने वाली यूनिट्स अब केवल 12 घंटे चल रही हैं
  • केमिकल और कच्चे माल की कीमतों में 30-50% तक बढ़ोतरी
  • एक्सपोर्ट लगभग ठप, आमदनी में भारी गिरावट

व्यापारियों के अनुसार, ईरान, इराक और इटली से आने वाली सप्लाई प्रभावित होने के कारण उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है।

जालोर: 50% ग्रेनाइट फैक्ट्रियां बंद

जालोर, जो ग्रेनाइट का बड़ा हब माना जाता है, वहां स्थिति और भी गंभीर है।

  • 1032 में से करीब 600 यूनिट्स ही चालू
  • उत्पादन 13 लाख से घटकर 4.55 लाख वर्ग फीट
  • हर दिन श्रमिकों का पलायन बढ़ रहा है

ग्रेनाइट एसोसिएशन के अनुसार, करीब 22% कारोबार एक्सपोर्ट पर निर्भर था, जो अब लगभग बंद हो चुका है। पहले जहां रोज 20-22 कंटेनर एक्सपोर्ट होते थे, अब यह पूरी तरह रुक गया है।

भीलवाड़ा: टेक्सटाइल सेक्टर पर ‘डबल मार’

भीलवाड़ा में टेक्सटाइल उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

  • 800 से 1000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट ऑर्डर अटके
  • उत्पादन लागत 20-30% तक बढ़ी
  • विदेशी खरीदार ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं

मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार, यहां करीब 2 लाख लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं, जिनकी रोजी-रोटी अब खतरे में है।

संकट की 4 बड़ी वजहें

  1. शिपिंग चार्ज: कंटेनर किराया 5-6 गुना बढ़ गया
  2. रॉ मटेरियल की कमी: सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित
  3. वर्किंग कैपिटल संकट: विदेशी भुगतान अटके
  4. पोर्ट पर माल फंसा: भारी होल्ड चार्ज लग रहा

उद्योग जगत की मांग

उद्योग से जुड़े संगठनों ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से राहत पैकेज और 6 महीने का मोरेटोरियम देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द मदद नहीं मिली, तो हजारों फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

निष्कर्ष

राजस्थान का औद्योगिक संकट केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक संकट भी बनता जा रहा है। उत्पादन में गिरावट, बढ़ती लागत और अटके हुए ऑर्डर ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है।

अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर गंभीर असर पड़ेगा।

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