खेत में भाला फेंकता लड़का बिहार नहीं, जालोर का हरीश: बिना संसाधनों के कर रहा प्रैक्टिस, कोच बोले- मौका मिले तो देश को दिला सकता है मेडल

Edited By Payal Choudhary, Updated: 22 Mar, 2026 04:45 PM

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सोशल मीडिया पर वायरल जावेलिन थ्रो का वीडियो बिहार का नहीं बल्कि राजस्थान के जालोर के 15 वर्षीय हरीश का है। बिना सुविधाओं के खेत में प्रैक्टिस कर रहा यह खिलाड़ी नीरज चोपड़ा जैसा बनने का सपना देख रहा है।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक 15 वर्षीय लड़के का भाला फेंकते हुए वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को बिहार का बताया जा रहा था, लेकिन जांच में सामने आया कि यह लड़का राजस्थान के जालोर जिले के भवराणी गांव का रहने वाला हरीश सरगरा है।

खेत में दौड़ते हुए भाला फेंकने का यह वीडियो लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है। खास बात यह है कि हरीश किसी बड़े स्टेडियम या ट्रेनिंग सेंटर में नहीं, बल्कि खेतों में ही अभ्यास कर रहा है।

नीरज चोपड़ा जैसा बनने का सपना

हरीश ने बताया कि वह देश के लिए खेलना चाहता है और ओलंपिक में मेडल जीतना उसका सपना है। वह भारतीय स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानता है।

उसने बताया कि उसके पिता गणेशाराम घरों में पेंटिंग और मजदूरी का काम करते हैं, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं है। इसके बावजूद वह अपनी पढ़ाई के साथ लगातार प्रैक्टिस कर रहा है।

खेतों में ही करता है प्रैक्टिस, नहीं है ग्राउंड

हरीश पिछले करीब 3 साल से भाला फेंक की तैयारी कर रहा है। उसके कोच और स्कूल के पीटीआई दिनेश कुमार राव ने बताया कि स्कूल में भाला फेंक के लिए उचित मैदान तक उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में हरीश और अन्य खिलाड़ी खेतों में ही अभ्यास करते हैं। कोच का कहना है कि अगर इन बच्चों को सही संसाधन और प्लेटफॉर्म मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

जिला स्तर पर दिखा चुका है प्रतिभा

हरीश जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुका है। भीनमाल में आयोजित प्रतियोगिता में उसने तीसरा स्थान हासिल किया था, जबकि अन्य प्रतियोगिता में दूसरा स्थान मिला।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी उसने भाग लिया, जहां उसने करीब 45 मीटर तक भाला फेंका। हालांकि वह पदक नहीं जीत पाया, लेकिन उसका प्रदर्शन सराहनीय रहा।

कोच बोले- सरकार दे ध्यान, निकल सकते हैं खिलाड़ी

कोच दिनेश कुमार राव, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं, का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, ग्राउंड और ट्रेनिंग उपलब्ध कराए तो ऐसे कई हरीश देश के लिए मेडल ला सकते हैं।

गांवों में छिपी है असली प्रतिभा

हरीश की कहानी यह दिखाती है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांवों में भी ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देख रहे हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और अवसर की, जिससे ये युवा देश का नाम रोशन कर सकें।

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