Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Feb, 2026 04:29 PM

नागौरी गेट सर्किल पर सोमवार दोपहर एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहगीरों को पलभर के लिए थाम लिया। दोपहर करीब 12 बजे सर्किल पर लगी करीब 100 फ़िट ऊँची हाई-मास्ट लाइट में एक घायल बाज फँस गया। ऊपर फड़फड़ाता पक्षी और नीचे बेबस खड़े लोग—मंज़र चिंताजनक था।
नागौरी गेट सर्किल पर सोमवार दोपहर एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहगीरों को पलभर के लिए थाम लिया। दोपहर करीब 12 बजे सर्किल पर लगी करीब 100 फ़िट ऊँची हाई-मास्ट लाइट में एक घायल बाज फँस गया। ऊपर फड़फड़ाता पक्षी और नीचे बेबस खड़े लोग—मंज़र चिंताजनक था।
घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय नागरिक आशीष भाटी ने सामाजिक कार्यकर्ता इस्माईल रंगरेज को दी। सूचना मिलते ही इस्माईल रंगरेज अपने साथी आसिफ़ खान के साथ मौके पर पहुँचे। प्रारंभिक प्रयासों में यह स्पष्ट हो गया कि इतनी अधिक ऊँचाई पर फँसे बाज को सामान्य तरीक़े से बचा पाना संभव नहीं है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम लिफ्ट वाली क्रेन के साथ घटनास्थल पर पहुँची। टीम में पप्पू सिंह (ऑपरेटर), अभिषेक कुमावत और मुकेश (फायरमैन) शामिल थे। क्रेन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
करीब 100 फ़िट की ऊँचाई तक क्रेन को सावधानीपूर्वक उठाया गया। इस्माईल रंगरेज ने पूरी सतर्कता और साहस के साथ ऊपर पहुँचकर घायल बाज को सुरक्षित पकड़ा। नीचे मौजूद लोगों की निगाहें इसी रेस्क्यू पर टिकी थीं। कुछ मिनटों की मेहनत के बाद बाज को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
रेस्क्यू के बाद घायल बाज को तुरंत वन विभाग के सुपुर्द किया गया, जहाँ उसका चिकित्सकीय उपचार किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, समय पर रेस्क्यू होने से बाज की जान बच सकी और उचित इलाज के बाद उसे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा।
यह घटना केवल एक पक्षी के बचाव तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह इंसानियत, संवेदनशीलता और टीमवर्क की एक बेहतरीन मिसाल बन गई। स्थानीय नागरिकों की सजगता, सामाजिक कार्यकर्ताओं की तत्परता और फायर ब्रिगेड की पेशेवर कार्यशैली ने यह साबित कर दिया कि यदि समय पर सही कदम उठाए जाएँ, तो हर ज़िंदगी को बचाया जा सकता है।
नागौरी गेट सर्किल पर हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन शहर के लिए एक सकारात्मक संदेश है—जहाँ लोग न केवल इंसानों, बल्कि बेज़ुबान पक्षियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी आगे आ रहे हैं। ऐसे प्रयास समाज में करुणा और जिम्मेदारी की भावना को और मज़बूत करते हैं।