मोहनगढ़ में नहर पानी को लेकर किसानों का उबाल, जीरो RD पर अनिश्चितकालीन धरना!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 06 Feb, 2026 02:33 PM

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मोहनगढ़ में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतिम छोर जीरो RD पर सिंचाई पानी की किल्लत को लेकर किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। फसलें सूखने से किसान आक्रोशित।

एक महीने से बूंद-बूंद को तरस रहे किसान

राजस्थान के मोहनगढ़ क्षेत्र में नहरों में सिंचाई पानी की भारी किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतिम छोर जीरो आरडी पर किसानों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले एक महीने से सिंचाई पानी न मिलने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। मजबूर होकर किसानों ने अब अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

फसलें सूखी, मेहनत और उम्मीद दांव पर

किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन पानी न मिलने से पूरी मेहनत बर्बादी की कगार पर है। खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं और आने वाले दिनों में हालात और भी खराब होने की आशंका है। किसानों का दर्द यही है कि अगर समय रहते पानी नहीं मिला तो उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

“पूरा पानी नहीं तो धरना खत्म नहीं”

धरने पर बैठे किसानों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नहरों में पर्याप्त मात्रा में सिंचाई पानी नहीं छोड़ा जाता। किसानों का कहना है कि वे अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन तक पहुंचने वाला पानी चाहते हैं। उनका आरोप है कि कागजों में पानी छोड़े जाने की बात होती है, लेकिन अंतिम छोर तक पानी पहुंचता ही नहीं।

प्रशासन ने दिया 600 क्यूसेक पानी का आश्वासन

धरने की सूचना मिलते ही एसडीएम सक्षम गोयल और नहर विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की। प्रशासन की ओर से 600 क्यूसेक पानी देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसानों ने इसे नाकाफी बताया। किसानों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार आश्वासन दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बार कुछ दिनों के बाद नहरें फिर सूख जाती हैं।

पहले भी टूट चुका है भरोसा

किसान नेता साभान खान ने बताया कि 27 जनवरी को जिला स्तर पर बड़ा सांकेतिक धरना दिया गया था। उस समय प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि 6 फरवरी तक 1400 क्यूसेक और उसके बाद 1700 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसी भरोसे पर किसानों ने धरना स्थगित किया था, लेकिन सिर्फ दो दिन पानी आया और उसके बाद पूरा ज़ोन फिर से सूख गया। इसी वजह से किसानों का प्रशासन से भरोसा पूरी तरह डगमगा चुका है।

भारी पुलिस जाप्ता तैनात, माहौल संवेदनशील

धरने को देखते हुए जीरो आरडी पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। नाचना वृत्ताधिकारी गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में मोहनगढ़, लाठी, PTM, तनोट और रामगढ़ थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्क नजर आया।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरने में शामिल किसान नेता चंद्रवीर सिंह ने प्रशासन से जल्द ठोस समाधान की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब भी किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ पानी की मांग नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और भविष्य से जुड़ा सवाल है।

सरकार से अंतिम उम्मीद

जीरो आरडी पर बैठे किसान सरकार और प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि जल्द से जल्द नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए, ताकि सूखती फसलें बच सकें और किसानों को राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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