जैसलमेर में सेना का ‘ब्रह्मास्त्र’ अभ्यास: अपाचे हेलिकॉप्टर ने 8 KM दूर टैंक किया ध्वस्त, ड्रोन भी किए नेस्तनाबूद!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Apr, 2026 10:55 AM

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राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय सेना ने अपनी आधुनिक युद्ध क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘ब्रह्मास्त्र’ नामक युद्धाभ्यास का आयोजन किया। यह हाई-टेक सैन्य अभ्यास पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया, जिसमें अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और अत्याधुनिक...

PunjabKesariराजस्थान के जैसलमेर में भारतीय सेना ने अपनी आधुनिक युद्ध क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘ब्रह्मास्त्र’ नामक युद्धाभ्यास का आयोजन किया। यह हाई-टेक सैन्य अभ्यास पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया, जिसमें अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और अत्याधुनिक हथियारों की मारक क्षमता का लाइव प्रदर्शन किया गया।

इस युद्धाभ्यास में भारतीय सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए AGM-114 हेलफायर मिसाइल, 70 एमएम हाइड्रा रॉकेट और M230 चेन गन का इस्तेमाल किया। अभ्यास सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चला, जिसमें दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को सटीक निशाने पर ध्वस्त किया गया।

सबसे खास पल तब आया जब अपाचे हेलिकॉप्टर ने लेजर-गाइडेड AGM-114 हेलफायर मिसाइल दागकर करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित टैंक को सटीक निशाना बनाते हुए नष्ट कर दिया। यह प्रदर्शन सेना की सटीकता और तकनीकी दक्षता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

 

इस अभ्यास के दौरान हेलिकॉप्टर ने 1500 से 2000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरते हुए दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया। पहले मिसाइल से टैंक को खत्म किया गया, इसके बाद नीचे आकर रॉकेट से दुश्मन के कैंप तबाह किए गए और अंत में चेन गन से छोटे-छोटे लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।

सिर्फ हवाई हमला ही नहीं, बल्कि इस अभ्यास में एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत भी दिखाई गई। आधुनिक रडार सिस्टम और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों की मदद से ड्रोन टारगेट्स को पहले ट्रैक किया गया, फिर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाम कर सटीक फायरिंग के जरिए आसमान में ही नष्ट कर दिया गया। खास बात यह रही कि पूरे अभ्यास के दौरान एक भी मिसफायर नहीं हुआ।

इस पूरे ऑपरेशन में ‘नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर’ का भी सफल परीक्षण किया गया, जिसमें जमीन पर मौजूद सैनिकों और हवा में उड़ रहे हेलिकॉप्टर के बीच रियल टाइम डेटा शेयर किया गया। इससे ऑपरेशन की गति और सटीकता दोनों में काफी सुधार देखने को मिला।

अभ्यास की जानकारी देते हुए ब्रिगेडियर पी.के. सिंह ने बताया कि इस फायरिंग से पहले कई हफ्तों तक तैयारी की गई थी। पायलटों ने सिमुलेशन के जरिए जटिल मिशनों का अभ्यास किया, वहीं तकनीकी टीम ने रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में हथियारों और सिस्टम की बारीकी से जांच की।

इस युद्धाभ्यास ने यह भी साबित कर दिया कि भारतीय सेना के पास मौजूद अपाचे हेलिकॉप्टर न केवल पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) के रेगिस्तानी इलाकों में प्रभावी हैं, बल्कि एलएसी (चीन सीमा) जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी दुश्मन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

सेना के पास अपाचे के अलावा ‘प्रचंड’ और ‘रुद्र’ जैसे अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर भी हैं। जहां अपाचे टैंकों को नष्ट करने में माहिर है, वहीं प्रचंड ऊंचाई वाले इलाकों में काम करता है और रुद्र छोटे ऑपरेशनों के लिए बेहद कारगर है।

पोकरण की रेत पर हुआ यह अभ्यास केवल एक सैन्य ड्रिल नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में तैयार, आधुनिक और सक्षम है।

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