9000 वर्गमीटर जमीन विवाद में JDA को झटका: हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर आवंटन के दिए आदेश

Edited By Payal Choudhary, Updated: 22 Mar, 2026 11:46 AM

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टोंक रोड स्थित एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम के पास 9000 वर्गमीटर जमीन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में Jaipur Development Authority (जेडीए) को बड़ा झटका लगा है। Rajasthan High Court ने जेडीए की विशेष अपील खारिज करते हुए जमीन के आवंटन के आदेश जारी करने...

टोंक रोड स्थित एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम के पास 9000 वर्गमीटर जमीन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में Jaipur Development Authority (जेडीए) को बड़ा झटका लगा है। Rajasthan High Court ने जेडीए की विशेष अपील खारिज करते हुए जमीन के आवंटन के आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।

खंडपीठ ने 6 अगस्त 2009 के एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश

अदालत ने जेडीए को निर्देश दिया कि वह राज्य सरकार के 12 मई और 19 मई 2003 के आदेशों को लागू करते हुए साई दर्शन होटल्स मोटल्स के पक्ष में 9000 वर्गमीटर जमीन का आवंटन पत्र जारी करे।

यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया।

15% विकसित जमीन का अधिकार माना

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रार्थी कंपनी को 15 प्रतिशत विकसित जमीन का अधिकार है और यह एकलपीठ का निर्णय पूरी तरह सही था।

खंडपीठ ने कहा कि—

  • राज्य सरकार अपने पूर्व निर्णयों से पीछे नहीं हट सकती
  • खासकर तब, जब संबंधित पक्ष उन निर्णयों पर भरोसा कर अपने मुकदमे वापस ले चुका हो

प्रार्थी कंपनी ने सभी शर्तें पूरी करते हुए अपने मुकदमे वापस ले लिए थे, इसलिए उसे जमीन का अधिकार देना न्यायसंगत है।

JDA के आरोप खारिज

जेडीए की ओर से दलील दी गई थी कि जमीन का आवंटन अवैध तरीके से हुआ है और इससे आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए।

हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि—

  • आवंटन राज्य सरकार की नीति के अनुरूप किया गया था
  • इसलिए इसे अवैध नहीं माना जा सकता

मुआवजा नहीं मिलने पर कोर्ट की टिप्पणी

खंडपीठ ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि—
कई वर्षों से जमीन का उपयोग जेडीए कर रहा है, लेकिन मूल मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों को उचित मुआवजा तक नहीं मिला

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अदालत में राशि जमा कराना, वास्तविक भुगतान नहीं माना जा सकता।

लंबे समय से चल रहा था विवाद

यह मामला पिछले दो दशकों से अधिक समय से लंबित था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जमीन आवंटन का रास्ता साफ हो गया है और संबंधित पक्ष को राहत मिलने की उम्मीद है।

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