हनुमान बेनीवाल के गढ़ में हुआ बवाल! मूर्ति विवाद में जोधियासी गांव में धारा-163 लागू

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Nov, 2025 03:18 PM

hanuman beniwal stronghold section 163 in jodhiyasi village

राजस्थान में सांसद हनुमान बेनीवाल के गढ़ नागौर जिले के जोधियासी गांव में सोमवार रात को महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाने को लेकर हिंसा और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि प्रशासन को गांव में दो महीने के लिए धारा-163 लागू करनी...

जयपुर। राजस्थान में सांसद हनुमान बेनीवाल के गढ़ नागौर जिले के जोधियासी गांव में सोमवार रात को महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाने को लेकर हिंसा और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि प्रशासन को गांव में दो महीने के लिए धारा-163 लागू करनी पड़ी।

 

आपको बता दें कि जोधियासी गांव में महाराजा सूरजमल की मूर्ति स्थापना को लेकर जोधियासी गांव में एक साल से विवाद चल रहा था, लेकिन सोमवार रात यह विवाद एक नया मोड़ ले लिया। गांव के दो पक्ष आमने-सामने आ गए, और इस दौरान पथराव भी हुआ। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने तुरंत कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए।

 

मूर्त‍ि स्थापना के लिए रात के समय एक पक्ष द्वारा मूर्ति लगाने की सूचना मिली, जिसके बाद गांव में तनाव बढ़ गया। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और पथराव की घटना सामने आई। पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। बाद में प्रशासन और दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, जिसमें एक समझौता हुआ। एक पक्ष ने महाराणा प्रताप की मूर्ति लगाने की मांग की, जिस पर प्रशासन ने दो सप्ताह का समय लिया।

 

चूंकि विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए गांव में धारा-163 लागू कर दी। इसके तहत किसी भी प्रकार के हथियारों और भड़काऊ भाषणों पर रोक लगा दी गई है। पुलिस और RAC के जवानों को गांव में तैनात किया गया है, और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए लगातार गश्त की जा रही है।

 

इस विवाद में एक ओर महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांव के प्रतिनिधियों का कहना था कि मूर्ति लगाने का प्रस्ताव ग्राम सभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन अब तक इसे प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। वहीं, विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि मूर्ति लगाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस स्थान पर इसे स्थापित किया गया है, वहाँ यह उचित नहीं है, क्योंकि वह एक सार्वजनिक स्थल है।

 

इस मामले पर जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने कहा कि मूर्ति लगाने के लिए अभी तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मिली है और प्रक्रिया विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम मौके पर भेजी गई थी। एसपी मृदुल कच्छावा ने भी कहा कि तीन महापुरुषों की मूर्तियों को स्थापित करने का प्रस्ताव था, जिसमें से एक मूर्ति रात के समय स्थापित की गई, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।

 

यह घटना इस बात का प्रतीक है कि सार्वजनिक स्थलों पर मूर्तियों की स्थापना के मुद्दे में संवेदनशीलता और प्रशासनिक अनुमति कितनी महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन ने अब धारा-163 लागू कर विवाद को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन गया है। जोधियासी गांव में तनाव कम करने के लिए अब आगे की क्या रणनीति होगी, यह देखने वाली बात होगी।

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