डमी कैंडिडेट बैठाकर बना सीनियर टीचर: 2 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार, SOG ने 2 को दबोचा!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 17 Mar, 2026 05:08 PM

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राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डमी कैंडिडेट बैठाकर सीनियर टीचर बनने वाले आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ एक डमी कैंडिडेट को भी पकड़ा गया है। दोनों आरोपी पिछले करीब दो साल...

राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डमी कैंडिडेट बैठाकर सीनियर टीचर बनने वाले आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ एक डमी कैंडिडेट को भी पकड़ा गया है। दोनों आरोपी पिछले करीब दो साल से पहचान छिपाकर फरार चल रहे थे।

एडीजी (SOG) Vishal Bansal ने बताया कि दिसंबर 2023 में दर्ज सीनियर टीचर भर्ती चीटिंग केस में आरोपी अशोक कुमार विश्नोई (29) को बाड़मेर से गिरफ्तार किया गया है। वहीं, डमी कैंडिडेट विजय पाल सिंह (30) को जालोर से पकड़ा गया।

2022 की परीक्षा में हुआ था फर्जीवाड़ा

जानकारी के अनुसार Rajasthan Public Service Commission द्वारा आयोजित सीनियर टीचर (सेकेंडरी एजुकेशन) भर्ती परीक्षा-2022 में यह फर्जीवाड़ा किया गया था।

24 दिसंबर 2022 को सामान्य ज्ञान, शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान विषय की परीक्षा हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के कारण इसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 29 जनवरी 2023 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

डमी बैठाकर बन गया सरकारी टीचर

जांच में सामने आया कि बाड़मेर के धोरीमन्ना निवासी अशोक कुमार विश्नोई ने अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा दिलवाई।

जालोर के बागोड़ा निवासी हनुमानाराम विश्नोई ने सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान की परीक्षा दी। हनुमानाराम पहले से ही सरकारी स्कूल में सीनियर टीचर (सामाजिक विज्ञान) के पद पर कार्यरत था।

इस फर्जीवाड़े के जरिए अशोक कुमार विश्नोई सीनियर टीचर (विज्ञान) के पद पर चयनित हो गया।

दो साल तक फरार, इनाम भी घोषित

SOG ने इस मामले में पहले ही हनुमानाराम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। जबकि मुख्य आरोपी अशोक कुमार पिछले दो साल से फरार चल रहा था।

उसकी गिरफ्तारी के लिए 5 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। लगातार लोकेशन बदलने के बावजूद SOG टीम ने उसे आखिरकार गिरफ्तार कर लिया।

अलग-अलग विषयों में अलग डमी कैंडिडेट

जांच में यह भी सामने आया कि इस भर्ती परीक्षा में अन्य अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह का तरीका अपनाया।

सवाई माधोपुर के बामनवास निवासी सूरत राम मीणा ने भी खुद परीक्षा देने के बजाय अलग-अलग विषयों के लिए डमी कैंडिडेट बैठाए।

विज्ञान विषय की परीक्षा के लिए उसने महिपाल विश्नोई को बैठाया, जिसे फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। महिपाल उस समय कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्र था।

वहीं सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान की परीक्षा डमी कैंडिडेट विजय पाल सिंह ने दी थी, जिसकी गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।

SOG की कार्रवाई जारी

SOG के अनुसार इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल थे और कितने लोगों ने इस तरीके से नौकरी हासिल की।

इस कार्रवाई के बाद राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

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