Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Nov, 2025 03:14 PM

जैसलमेर बस हादसे के बाद परिवहन विभाग की सख्ती से शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। पहले प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और अब बस बॉडी बिल्डर्स भी मैदान में उतर आए हैं। ऑल राजस्थान बस ट्रक बॉडी बिल्डर्स एसोसिएशन ने परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं
जयपुर। जैसलमेर बस हादसे के बाद परिवहन विभाग की सख्ती से शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। पहले प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और अब बस बॉडी बिल्डर्स भी मैदान में उतर आए हैं। ऑल राजस्थान बस ट्रक बॉडी बिल्डर्स एसोसिएशन ने परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि विभाग की कार्रवाई नियमों के नाम पर उत्पीड़न बनकर रह गई है। जैसलमेर बस हादसे के बाद, राजस्थान भर में परिवहन विभाग ने ज्यादातर बस बॉडी बिल्डिंग कारखानों को बंद कर दिया है। कारखानों में तैयार खड़ी बसें और मरम्मत के लिए खड़ी गाड़ियां भी सीज कर दी गई हैं। बिल्डर्स का कहना है कि वे सभी नियमों का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन विभाग की सख्ती के कारण उनके कारखाने बंद कर दिए गए हैं। इससे छोटे कारोबारियों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से कारखानों को फिर से खोलने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। उनका कहना है कि परिवहन विभाग द्वारा सीज किए गए कारखानों के बिना नोटिस कार्रवाई करने से किसी भी तरह का न्याय नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, परिवहन मंत्री और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा से हस्तक्षेप की अपील की गई है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कारखाने नहीं खोले गए और उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं रुकी, तो वे अपने कारखानों की चाबियां मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम या परिवहन कमिश्नर को सौंप देंगे।
महामंत्री महावीर प्रसाद शर्मा का कहना है कि जैसलमेर हादसे के बारे में उन्हें भी दुख है, लेकिन इसका दोष सिर्फ बस बिल्डर्स और ऑपरेटर्स पर डालना ठीक नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हवाई जहाजों, ट्रेनों और कारों में भी दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन क्या कभी उन कंपनियों पर कार्रवाई की जाती है?
एसोसिएशन का यह भी कहना है कि यदि छोटे कारखाने इसी तरह बंद रहे तो यह उद्योग बड़े पूंजीपतियों के हाथ में चला जाएगा, जिससे हजारों मजदूरों और छोटे व्यवसायियों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार और परिवहन विभाग इस विवाद को हल करने के लिए कदम उठाते हैं या फिर मामला और गहरा होता है।