28 अगस्त को लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखाई नहीं देंगा चंद्र ग्रहण, भारत में मान्य नहीं होगा सूतक काल

Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Aug, 2026 01:03 PM

second lunar eclipse of 2026 on august 28 not visible in india

जयपुर। शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा यानी सावन महीने की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं है।

जयपुर। शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा यानी सावन महीने की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं है। रक्षाबंधन से जुड़े धर्म-कर्म पूरे दिन बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगा था। चंद्रग्रहण के साथ सावन का महीना भी खत्म होगा। यह चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। जिसमें चांद लालिमा के साथ दिखाई देगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़ेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। 

लेकिन राहत की बात यह है कि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु रक्षाबंधन पर्व पूरे धार्मिक उत्साह और विधि-विधान से मना सकेंगे। धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहण का सूतक तभी माना जाता है, जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दृश्य हो। चूंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए मंदिरों के पट बंद करने, पूजा-अर्चना रोकने या धार्मिक अनुष्ठानों में किसी प्रकार का परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं होगी। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। आंशिक चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा के केवल एक हिस्से को ढकती है। इसी कारण चंद्रमा का कुछ भाग सामान्य रूप से दिखाई देता है, जबकि बाकी हिस्से पर अंधेरा नजर आता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण में इसके विपरीत चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है।

28 अगस्त 2026 को लगेगा चंद्र ग्रहण 
वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण  शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा। इसलिए यहां इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की सुबह 8:04 मिनट से शुरू होगा और सुबह 11:22 मिनट तक चलेगा। यह खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। पंचांग के अनुसार यह ग्रहण श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा, जिस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। यह ग्रहण यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, अंटार्कटिका के क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रहण की खासियत यह होगी कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा पर पड़ेगी। इसी कारण यह सामान्य आंशिक ग्रहण की तुलना में काफी गहरा दिखाई देगा और दुनिया के कई हिस्सों में चंद्रमा का बड़ा भाग लाल-नारंगी रंग का नजर आ सकता है। भारत में ग्रहण के समय चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए देश में इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा। 

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण
28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसकी दृश्यता मुख्य रूप से उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में रहेगी। भारत में ग्रहण नजर नहीं आने के कारण यहां इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

बिना किसी बाधा के मनाएं रक्षाबंधन
भारत में अदृश्य ग्रहण का धार्मिक कर्मकांडों पर प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए रक्षाबंधन पर राखी बांधने, श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और पूर्णिमा पूजन भी बिना किसी बाधा के संपन्न होंगे। 

शुभ-अशुभ प्रभाव
ग्रहण की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड भूकंप गैस दुर्घटना वायुयान दुर्घटना होने की संभावना।  प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। व्यापार में तेजी आएगी। खेती और इससे जुड़े कामों में नुकसान होने के योग बन रहे हैं। देश में कई जगह ज्यादा बारिश होगी। प्राकृतिक घटनाएं होगी। भूकंप आने की संभावना है। तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं। यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है। बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है। शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे। सामुद्रिक तूफान और जहाज-यान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। खदानों में दुर्घटना और भूकंपन से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा। होटल रेस्टोरेंट वालों के लिए बहुत ही अच्छा समय होगा। सांस्कृतिक रूप से कोई कोई विवाद या उत्तल पुथल होने की संभावना।

करें पूजा-पाठ और दान
ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

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