Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Apr, 2026 03:30 PM
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि हिन्दी पंचांग का दूसरा महीना वैशाख 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा। इसके बाद ज्येष्ठ मास शुरू होगा।
जयपुर। वैशाख महीना 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा। इन दिनों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने की परंपरा है। इस हिंदी महीने के देवता भगवान विष्णु हैं, इसलिए पुराणों में कहा गया है कि वैशाख मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से अनंत शुभ फल मिलता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि वैशाख महीने में स्नान-दान के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्म और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में भी कहा गया है कि वैशाख महीने में की गई भगवान विष्णु की पूजा से कई गुना पुण्य फल मिलता है। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि हिन्दी पंचांग का दूसरा महीना वैशाख 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा। इसके बाद ज्येष्ठ मास शुरू होगा। वैशाख में गर्मी काफी अधिक रहती है, इसलिए इस माह में पूजा-पाठ के साथ ही जूते-चप्पल, पानी और छाते का दान करने की परंपरा है। शिवलिंग पर ऐसी चीजें खासतौर पर चढ़ाएं जो शीतलता देती हैं, जैसे ठंडा पानी और चंदन।इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने की और तीर्थ दर्शन करने का महत्व काफी अधिक है। इन दिनों में गर्मी अधिक रहती है तो खान-पान में लापरवाही न करें। जीवन शैली में भी बदलाव करना चाहिए। सुबह जल्दी उठें और रात में जल्दी सो जाएं। खाने में ऐसी चीजें शामिल न करें, जिनसे पेट संबंधी बीमारी हो सकती है। इस माह में खरमास समाप्त हो जाता है और शादी, विवाह के मुहुर्त भी फिर से निकल जाते हैं।
हिंदी कैलेंडर में माह का नाम पूर्णिमा के दिन जिस नक्षत्र में चंद्रमा होता है। उस आधार पर किया जाता है। वैशाख माह का नाम विशाखा नक्षत्र के नाम से लिया गया है।वैशाख पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होते हैं, इसलिए इसका नाम वैशाख पड़ा।
वैशाख मास
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। यह तिथि 2 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे शुरू होगी और 3 अप्रैल को सुबह 8:42 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर वैशाख मास की शुरुआत शुक्रवार 3 अप्रैल से मानी जाएगी।
स्कंदपुराण के अनुसार
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंङ्गया समम्।।
स्कंद पुराण के इस श्लोक के अनुसार वैशाख के समान कोई और मास नहीं है। सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान को शास्त्र नहीं है और गंगा जी के समान कोई तीर्थ नहीं है।वैशाख मास शुक्रवार से शुरू होगा और शुक्रवार को ही खत्म होगा। मान्यता है कि इस माह में किए गए पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य मिलता है और भगवान की कृपा से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। ये महीना वृक्षों में कल्पवृक्ष के समान और शिवजी, विष्णु को प्रसन्न करने वाला माना गया है।
पद्मपुराण, पातालखण्ड के अनुसार
यथोमा सर्वनारीणां तपतां भास्करो यथा ।आरोग्यलाभो लाभानां द्विपदां ब्राह्मणो यथा।।
परोपकारः पुण्यानां विद्यानां निगमो यथा।मंत्राणां प्रणवो यद्वद्ध्यानानामात्मचिंतनम् ।।
सत्यं स्वधर्मवर्तित्वं तपसां च यथा वरम्।शौचानामर्थशौचं च दानानामभयं यथा ।।
गुणानां च यथा लोभक्षयो मुख्यो गुणः स्मृतः।मासानां प्रवरो मासस्तथासौ माधवो मतः ।।
जैसे सम्पूर्ण स्त्रियों में पार्वती, तपने वालों में सूर्य, लाभों में आरोग्यलाभ, मनुष्यों में ब्राह्मण, पुण्यों में परोपकार, विद्याओं में वेद, मन्त्रों में प्रणव, ध्यानों में आत्मचिंतन, तपस्याओं में सत्य और स्वधर्म-पालन, शुद्धियों में आत्मशुद्धि, दानों में अभयदान तथा गुणों में लोभ का त्याग ही सबसे प्रधान माना गया है, उसी प्रकार सब मासों में वैशाख मास अत्यंत श्रेष्ठ है।
महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “निस्तरेदेकभक्तेन वैशाखं यो जितेन्द्रियः। नरो वा यदि वा नरी ज्ञातीनां श्रेष्ठतां व्रजेत्।।” जो स्त्री अथवा पुरूष इन्द्रिय संयम पूर्वक एक समय भोजन करके वैशाख मास को पार करता है, वह सहजातीय बन्धु-बान्धवों में श्रेष्ठता को प्राप्त होता है।। दत्तं जप्तं हुतं स्नातं यद्भक्त्या मासि माधवे।तदक्षयं भवेद्भूप पुण्यं कोटिशताधिकम् ।। माधवमास में जो भक्तिपूर्वक दान,जप, हवन और स्नान आदि शुभकर्म किये जाते हैं, उनका पुण्य अक्षय तथा सौ करोड़ गुना अधिक होता है।प्रातःस्नानं च वैशाखे यज्ञदानमुपोषणम्।हविष्यं ब्रह्मचर्यं च महापातकनाशनम् ।। वैशाख मास में सवेरे का स्नान, यज्ञ, दान, उपवास, हविष्य-भक्षण तथा ब्रह्मचर्य का पालन - ये महान पातकों का नाश करने वाले हैं।
स्नान और जलदान का महत्व
स्कंद, पद्म, ब्रह्मवैवर्त पुराण और महाभारत में वैशाख महीने को बहुत खास बताया गया है। इन ग्रंथों में कहा गया है कि वैशाख मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने, जलदान और तीर्थ में नहाने से हर तरह के दुख खत्म हो जाते हैं। वैशाख महीने में इन कामों को करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है।
भगवान विष्णु की पूजा
सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर नहाएं। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। भगवान विष्णु की पूजा करने का संकल्प लें। पूजा किसी ब्राह्मण से करवाएंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा।भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। चरणामृत ग्रहण करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। भगवान को फूल, धूप, नैवेद्य आदि सामग्री चढ़ाएं। दीपक जलाएं। विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। व्रत की कथा सुनें। दूसरे दिन यानी द्वादशी पर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
वैशाख मास में करे शुभ काम
सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं।भगवान विष्णु के साथ ही देवी महालक्ष्मी की पूजा भी करें।किसी मंदिर जाएं और ध्वज यानी झंडे या पानी से भरे मटके का दान करें।शिवजी के सामने दीपक जलाएं और श्रीराम नाम का जाप 108 बार करें।शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं।इस माह में हमें सूर्यादय से पहले उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत करें।वैशाख में तीर्थ दर्शन करें और नदियों में स्नान करें। अगर यात्रा नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।ये गर्मी का समय है। इस महीने में पानी का दान करें। किसी सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ लगाएं या किसी प्याऊ में मटके का दान करें। इस माह में जो व्यक्ति प्याउ लगवाता है, वह देवता, ऋषि और पितर सभी को तृप्त करता है। प्यासों के लिए पानी और धूप से बचने के लिए छाते का दान करें। जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल का भी दान करें। आप चाहें तो किसी मंदिर में पंखों का दान भी कर सकते हैं।
करियर में तरक्की के लिए
वैशाख के महीने में तुलसीपत्र से श्रीहरी के माधव स्वरुप की पूजा करें और इसके साथ ही भगवान विष्णु के नाम गोविंद और केशव का ध्यान करें।
सुख-समृद्धि पाने के लिए
वैशाख के महीने में भगवान विष्णु के तुलसी के पत्ते के साथ शहद अर्पित करें और भगवान विष्णु के माधव स्वरुप के साथ भगवान अनंत और अच्युत स्वपूर का स्मरण करें। इससे घर में सुख-समृ्द्धि आती है।
संकटों से मुक्ति के लिए
अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई संकट ना आए तो वैशाख महीने में भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं और एक तुलसी का पत्ता उसमें डाल दें। इसके अलावा भगवान विष्णु के दामोदर और नारायण स्वरुप का स्मरण करें।
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए
अगर आप चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो तो इसके लिए आप बैशाख के महीने में भगवान विष्णु को आटे से बनी पंजीरी में तुलसी दल डालकर भोग लगाना चाहिए और भागवान विष्णु के माधव व नारायण स्वरुप का ध्यान करें।
दांपत्य जीवन खुशहाली के लिए
पति-पत्नी अपने दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने के लिए वैशाख के महीने में भगवान विष्णु को मिठाई का भोगा लगाएं और उनके माधव स्वरूप के साथ भगवान श्रीधर और पद्मानाभ स्वरूप का भी ध्यान करें।
व्यापार में बढ़ोतरी के लिए
अगर आप अपने व्यापार में बढ़ोतरी चाहते हैं तो वैशाख मास में भगवान विष्णु की तुलसीपत्र से पूजा करनी चाहिए। इससे आपका बिजनेस दिन-दुगनी, रात-चौगनी तरक्की करेगा। इसके अलावा विष्णु जी के माधव स्वरूप के साथ त्रिविकरम और हृषिकेष का ध्यान करना चाहिए।