22 जुलाई को विवाह, मुंडन, पूजा-पाठ के लिए अबुझ मुहूर्त, भडल्या नवमी पर बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं शुभ काम

Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jul, 2026 02:45 PM

bhadliya navami 2026 auspicious day for marriage mundan religious ceremonies

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे होगा।

जयपुर। सनातन धर्म में भडल्या नवमी का विशेष महत्व है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो भडल्या नवमी पर बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के सभी प्रकार के शुभ कार्य कर सकते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 22 जुलाई को भडल्या नवमी मनाई जाएगी।  यह दिन अक्षय तृतीया की तरह शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। भडल्या नवमी स्वंयसिद्ध तिथि है। इस तिथि पर सभी प्रकार के शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। 

 

भडल्या नवमी 22 जुलाई को है। यह इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त है। हालांकि इस समय गुरु अस्त चल रहे हैं, इसलिए मांगलिक कार्यों पर रोक लगी हुई है, फिर भी भडल्या नवमी को अबूझ मुहूर्त माने जाने से इस दिन काफी संख्या में विवाह होंगे। इसके 2 दिन बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चार महीने के लिए सभी मांगलिक कार्य थम जाएंगे, जो एक नवंबर को देवों के जागने के साथ शुरू होंगे।

 

अद्ये कस्यापि मूढत्वे शुभकर्म न दोषकृत्। द्वयो मूढत्व मे प्रोक्तं दोषदं गुरुशुक्रयो:।।
ज्योतिष विद्वानों और शास्त्र के अनुसार अबूझ मुहूर्त में किसी प्रकार का पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है और इसमें गुरु या शुक्र तारा अस्त भी नहीं देखा जाता है।

 

22 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल नवमी है। इसे भडल्या नवमी कहते हैं। इस दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी खत्म हो रही है। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, इस तिथि से चार महीनों के लिए श्रीहरि विश्राम करते हैं, इसलिए शुभ कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली भडल्या नवमी को अबुझ मुहूर्त माना जाता है यानी इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकते हैं। अभी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है, इस नवरात्रि की अंतिम भड़ली नवमी रहती है। इस नवमी पर गणेश जी, शिव जी और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, छाता, जूते-चप्पल, कपड़े का दान करना चाहिए।

 

भडल्या नवमी तिथि
पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 22 जुलाई को मनाई जाएगी।

 

गुरु तारा चल रहा है अस्त
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसके बाद भगवान विष्णु के योग निद्रा में होने की वजह से अगले 4 महीने तक कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में चातुर्मास शुरू होने से पहले शुभ काम करने का अंतिम दिन भडल्या नवमी तिथि को होता है। पिछले करीब 1 महीने से विवाह के कारक ग्रह देव गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में अस्त चल रहे हैं। 

 

15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमास
इस वर्ष नवंबर में केवल सात दिन और दिसंबर में सिर्फ पांच दिन विवाह मुहूर्त है। 15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमास होने से विवाह नहीं हो सकेंगे। विवाह मुहूर्त 15 दिसंबर से चार फरवरी तक भी नहीं होंगे। शुक्र ग्रह के उदित होने के बाद पांच फरवरी से शुरुआत होगी।

 

अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्त
भडल्या नवमी अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्त के रूप में मानी गई है। यानी इस दिन शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त के विचार की जरूरत नहीं होती। 

 

महत्व
भडल्या नवमी तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। इस तिथि पर शुभ कार्य करने के लिए ज्योतिष गणना की आवश्यकता नहीं पड़ती है। किसी भी समय जातक अपनी सुविधा के अनुसार शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही शुभ कार्य का श्रीगणेश कर सकते हैं। इस तिथि पर शुभ कार्य करने से अक्षय तृतीया के समतुल्य फल प्राप्त होता है।

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