Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Sep, 2026 03:37 PM
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस साल आश्विन महीना 27 सितंबर से शुरू हो रहा है और 26 अक्तूबर 2026 को समाप्त होगा।
आश्विन महीना हिंदू कैलेंडर का सातवां महीना होता है। जो आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में आता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना बेहद खास माना गया है, क्योंकि इसमें देवी-देवताओं के साथ पितरों का आशीर्वाद पाने का विशेष अवसर भी मिलता है। इस महीने में पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्रि और दशहरा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पड़ते। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस साल आश्विन महीना 27 सितंबर से शुरू हो रहा है और 26 अक्तूबर 2026 को समाप्त होगा। आश्विन माह का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। इस महीने के कृष्ण पक्ष में पितरों को याद करके तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। पितृपक्ष का आखिरी दिन सर्वपितृ अमावस्या होता है।, जिससे आश्विन अमावस्या के दिन पितृपक्ष समाप्त हो जाता है। हिंदू धर्म में आश्विन मास का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार आश्विन मास का प्रत्येक दिन अपने आप में काफी विशेष होता है।
आश्विन मास में जहां 15 दिन पितृ पक्ष चलता है वहीं 9 दिन शारदीय नवरात्रि की धूम रहती है। इस माह में नवरात्रि, दशहरा जैसे कई पवित्र व्रत और त्योहार आते हैं। इन व्रत त्योहारों में भक्त श्रद्धापूर्वक ढंग से पूजा और अर्चना करते हैं। इसके अलावा अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए लोग कई तरह के उपाय इस माह में करते हैं। इस मास में मां दुर्गा को समर्पित है। इस महीने में देव पूजन भी किया जाता है। इस महीने से सूर्य देव धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं।
अश्विन महीना
इस साल आश्विन महीना 27 सितंबर से शुरू हो रहा है और 26 अक्तूबर 2026 को समाप्त होगा। इस महीने में कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए और कुछ चीजों से परहेज करना भी जरूरी होता है।
आश्विन मास का महत्व
आश्विन मास में बहुत से विभिन्न त्योहार पड़ते हैं। इसकी शुरुआत श्राद्ध पक्ष से होती है। आश्विन मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक पितृपक्ष के दौरान पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इससे प्रसन्न होकर पितर हम पर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसके साथ ही शारदीय नवरात्रि और दशहरा जैसे पर्व आते हैं।
आश्विन मास में दान करें
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को धन, वस्त्र, भोजन, फल, मिष्ठान आदि का दान देने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पितृ पक्ष
पितृ पक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्तूबर तक है। इस दौरान रोजाना पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाएगा। वहीं, 10 अक्तूबर को सर्वपितृ तर्पण किया जाएगा। पितृ पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से साधक पर पूर्वजों की कृपा बरसती है।
शारदीय नवरात्र
इस साल 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। वहीं 20 अक्टूबर को विजयादशमी है। आसान शब्दों में कहें तो 11 अक्टूबर से लेकर 20 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्र है। 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। शारदीय नवरात्र के दौरान जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
आश्विन एकादशी
आश्विन माह में इंदिरा और पापाकुंशा एकादशी मनाई जाती है। इस साल 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। वहीं 20 अक्टूबर को दशहरा और 22 अक्टूबर को पापाकुंशा एकादशी है। इस शुभ अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी के निमित्त व्रत रखा जाएगा।
क्या करें
आश्विन माह के दौरान किसी भी अन्य व्यक्ति के प्रति मन में बैर की भावना नहीं रखनी चाहिए और सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। पूरे आश्विन मास के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि आप कम से कम गुस्सा करें और मन को शांत रखें। इस दौरान दान करना शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति दान करता है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. तिल और घी का दान करना चाहिए। आश्विन माह के दौरान घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस महीने में मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही शुभ होता है। इससे घर में खुशहाली आती है और दुर्गा की कृपा घर पर बनी रहती है।
क्या न करें
आश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि का त्योहार भी पड़ता है, इसलिए इस समय मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान दूध का सेवन करने और करेला खाने से परहेज करना चाहिए। लहसुन, प्याज, और सफेद तिल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, लौकी, मूली और सरसों का साग नहीं खाना चाहिए. काला नमक, सत्तू, जीरा और मसूर की दाल खाने से बचना चाहिए। पूरे आश्विन माह में किसी भी तरह के विवाद, झगड़ा, मनमुटाव या तनाव से बचना चाहिए। इन बातों का पालन करने से आश्विन माह का महत्व और पुण्य प्राप्त होता है।
आश्विन मास 2026
27 सितंबर पितृ पक्ष आरंभ
29 सितंबर विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी
3 अक्टूबर जीवित्पुत्रिका व्रत और महालक्ष्मी व्रत समापन
4 अक्टूबर मातृ नवमी
6 अक्टूबर इंदिरा एकादशी
8 अक्टूबर प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि
10 अक्टूबर सर्व पितृ अमावस्या और महालय
11 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि आरंभ
20 अक्टूबर विजयादशमी और दशहरा
22 अक्टूबर पापांकुशा एकादशी
25 अक्टूबर कोजागरी पूजा और शरद पूर्णिमा
26 अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा