हाईटेक स्मैक तस्करी की गिरफ्त में साहवा, नशे की दलदल में फंसता युवा भविष्य

Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Jan, 2026 03:28 PM

high tech smack trafficking tightens grip on sahwa youth trapped in drug menace

साहवा (चूरू)। चूरू जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित सीमावर्ती कस्बा साहवा इन दिनों नशे की एक गंभीर और खतरनाक समस्या से जूझ रहा है। पंजाब, हरियाणा, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से सटे इस इलाके में स्मैक (चिट्टा/हेरोइन) सहित अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी तेजी...

साहवा (चूरू)। चूरू जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित सीमावर्ती कस्बा साहवा इन दिनों नशे की एक गंभीर और खतरनाक समस्या से जूझ रहा है। पंजाब, हरियाणा, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से सटे इस इलाके में स्मैक (चिट्टा/हेरोइन) सहित अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी तेजी से फैल रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि साहवा को जिले में नशे के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाने लगा है। सबसे चिंता का विषय यह है कि इस घातक नशे की चपेट में बड़ी संख्या में युवा वर्ग आ रहा है, जिससे उनका भविष्य अंधकार की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नशे का यह अवैध कारोबार अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहा। तस्करों ने मोबाइल फोन, कोडवर्ड, सीमित समय के सिम कार्ड और डिजिटल नेटवर्क का सहारा लेकर इसे पूरी तरह हाईटेक बना लिया है। बसों, ट्रेनों, कैब टैक्सियों और निजी वाहनों के जरिए स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों की आपूर्ति की जा रही है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाली खेप पहले बड़े सौदागरों तक पहुंचती है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर इसे युवाओं और नशेड़ियों तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि साहवा में स्मैक की उपलब्धता इतनी बढ़ गई है कि यह आसानी से मिल जाती है।

साहवा में पुलिस थाना खुलने के बाद एनडीपीएस एक्ट के तहत कई प्रकरण दर्ज हुए हैं और कुछ आरोपी जेल भी भेजे गए हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि कार्रवाई अधिकतर छोटे स्तर के तस्करों तक ही सीमित रहती है। असली सरगना और बड़े नेटवर्क पुलिस की पकड़ से अब भी दूर हैं। जिस स्मैक ने पंजाब की युवा पीढ़ी को तबाह किया, वही जहर अब राजस्थान के गांवों तक पहुंच चुका है। अफीम और पोस्त जैसे पारंपरिक नशों के बाद अब स्मैक, नशीली गोलियां और इंजेक्शन युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। खासकर 20 से 30 वर्ष की आयु के युवक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अपराध और सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ रही है।

नशे का असर अब परिवारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नशा न मिलने पर असामान्य व्यवहार, घरेलू कलह और आर्थिक तंगी आम हो गई है। नशा मुक्ति केंद्रों पर दबाव बढ़ रहा है, जहां स्मैक की लत छुड़ाना बेहद कठिन बताया जा रहा है। पिछले वर्ष श्रीगंगानगर में ड्रोन से आई स्मैक की खेप में साहवा के युवक की गिरफ्तारी ने यह संकेत भी दिया कि कस्बे के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा ने नशे के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता जताते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने अभिभावकों और समाजसेवी संगठनों से भी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वहीं डीएसपी तारानगर रोहित सांखला ने बताया कि पुलिस मुख्यालय जयपुर के निर्देशानुसार नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। थानाधिकारी शंकरलाल भारी के अनुसार साहवा थाना क्षेत्र में स्मैक सहित सभी नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन में लिप्त लोगों को चिन्हित कर नियमित कार्रवाई की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रशासन, पुलिस, समाज और परिवार मिलकर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक साहवा को नशे के इस अंधकार से बाहर निकालना आसान नहीं होगा।

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