श्रीसांवलियाजी धाम: श्रद्धालुओं की भीड़, निजी वाहनों की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 20 Jul, 2025 03:33 PM

the arbitrariness of private vehicles and the silence of the administration

चित्तौड़गढ़ । राजस्थान ही नहीं, देशभर से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आस्था के साथ प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर कोई अपने-अपने साधन से इस पवित्र स्थल पर मनोकामना लेकर आता है। लेकिन श्रद्धा की इस राह में कुछ निजी वाहन...

चित्तौड़गढ़ । राजस्थान ही नहीं, देशभर से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आस्था के साथ प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर कोई अपने-अपने साधन से इस पवित्र स्थल पर मनोकामना लेकर आता है। लेकिन श्रद्धा की इस राह में कुछ निजी वाहन संचालकों की लापरवाही और लालच श्रद्धालुओं की यात्रा को खतरे में डाल रही है।

निजी वाहन संचालकों की मनमानी
रोडवेज बसें जहां नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित पहुंचा रही हैं, वहीं निजी बसें और ऑटो चालक अपने फायदे के लिए यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। शहर के प्रतापनगर चौराहे और रेलवे स्टेशन पर ऑटो चालक अधिक किराया मांगते हैं। छह सीटर ऑटो में 10 से 15 सवारी तक ठूंस दी जाती हैं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है। चित्तौड़गढ़, मंगलवाड़ और कपासन से चलने वाली निजी व लोक परिवहन बसें भी यात्रियों को बस की छत तक बैठा ले जाती हैं, जबकि बस के अंदर पर्याप्त जगह होती है।

प्रशासन बना मूकदर्शक
यह पूरी स्थिति राष्ट्रीय राजमार्ग पर घट रही है, जहां यातायात सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की बनती है। भादसौड़ा चौराहे और हाईवे पर पुलिसकर्मी एवं इन्टरसेप्टर वाहन तैनात रहते हैं, लेकिन यह अधिकारी सिर्फ ट्रकों को निशाना बनाते हैं और निजी बसों की अनदेखी कर देते हैं। वसूली में व्यस्त विभागीय कर्मचारी दुर्घटनाओं से कोई सबक नहीं ले रहे हैं।

मानसून में और भी बढ़ा खतरा
इन दिनों मानसून सक्रिय है, सड़कों पर जलभराव और फिसलन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ओवरलोड वाहनों से हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी और निष्क्रियता से लगता है मानो वे किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हों।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनानी होगी प्राथमिकता
श्री सांवलियाजी आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं, विश्वास और उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि उनकी यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और शोषण-मुक्त हो।

जरूरत है —
निजी वाहनों की नियमित निगरानी की
ऑटो और बस संचालकों की मनमानी पर रोक की
पुलिस और परिवहन विभाग की जवाबदेही तय करने की
मानसून के दौरान विशेष निगरानी की व्यवस्था लागू करने की
श्रद्धा के इस पवित्र स्थल पर अव्यवस्था का धब्बा न लगे, इसके लिए प्रशासन को अब नींद से जागना होगा।

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