साहित्य देश निर्माण का सशक्त माध्यम : अर्जुन राम मेघवाल

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 06:36 PM

literature is a powerful tool for nation building arjun ram meghwal

बीकानेर। केन्द्रीय क़ानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि साहित्य देश निर्माण का एक सशक्त और प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने साहित्यकारों और लेखकों से आह्वान किया कि वे ऐसी रचनाओं का सृजन करें, जो जन-जन में राष्ट्रप्रेम, त्याग,...

बीकानेर। केन्द्रीय क़ानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि साहित्य देश निर्माण का एक सशक्त और प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने साहित्यकारों और लेखकों से आह्वान किया कि वे ऐसी रचनाओं का सृजन करें, जो जन-जन में राष्ट्रप्रेम, त्याग, स्वाभिमान और सकारात्मक सोच को जागृत करें। उन्होंने कहा कि जब लेखनी राष्ट्रहित से जुड़ती है, तब वह केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज और देश को दिशा देने वाली शक्ति बन जाती है।

 

मेघवाल नई दिल्ली के अकबर रोड स्थित गर्वी गुजरात भवन में भारतीय भाषा और साहित्य संगम तथा वीणा म्यूजिक द्वारा विश्व पुस्तक मेला में भाग लेने आए लेखकों एवं साहित्यकारों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पद्मश्री सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी के लोकगीतों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से देशप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुंचाया है, उसी प्रकार साहित्यकारों को भी अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रहित का संदेश देना चाहिए।

 

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    केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्य उसके साहित्य में प्रतिबिंबित होते हैं। साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला प्रभावी माध्यम है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि साहित्य भाषा, जाति, क्षेत्र और वर्ग की सीमाओं को पार कर लोगों को एक साझा राष्ट्रीय चेतना से जोड़ सकता है।

     

    उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे साहित्य की है, जो युवाओं को प्रेरित करे, उन्हें अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़े तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करे। देशप्रेम केवल नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विचार, व्यवहार और रचनात्मक अभिव्यक्ति में भी दिखाई देना चाहिए।

     

    मेघवाल ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब साहित्यकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से निराशा और नकारात्मकता के स्थान पर आशा, संवाद और समाधान का मार्ग दिखा सकते हैं।

     

    कार्यक्रम के प्रारम्भ में भारतीय भाषा और साहित्य संगम जयपुर के संरक्षक हेमजीत मालू तथा अध्यक्ष डॉ. कुमेश कुमार जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर दूरदर्शन के निदेशक अखिलेश शर्मा सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार उपस्थित रहे।

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