Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Apr, 2026 09:28 AM

राजस्थान के बीकानेर जिले में सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल को गति मिली है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने लूणकरणसर उपखंड के सहजसर गांव में चल रही जैविक कृषि एवं पशुपालन परियोजना को अपना समर्थन दिया है।...
राजस्थान के बीकानेर जिले में सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल को गति मिली है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने लूणकरणसर उपखंड के सहजसर गांव में चल रही जैविक कृषि एवं पशुपालन परियोजना को अपना समर्थन दिया है। यह परियोजना राज्य में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
यह पहल कोफार्मिन फेडरेशन (कोफेड) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य सहजसर को 100 प्रतिशत जैविक ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करना है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह पश्चिमी राजस्थान का पहला ऐसा गांव होगा, जो पूरी तरह से जैविक मॉडल पर आधारित होगा।
इससे पहले कोफेड द्वारा कोटपूतली क्षेत्र के बामनवास कांकर गांव में भी इसी तरह का जैविक मॉडल विकसित करने की प्रक्रिया जारी है, जिसने इस नई पहल के लिए आधार तैयार किया है।
परियोजना को लेकर कोफेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेन्द्र सेवावत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री सुमित गोदारा से मुलाकात की और उन्हें इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से परियोजना के मुख्य पर्यवेक्षक के रूप में मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना और पशुपालन को मजबूत बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, जैविक खेती अपनाने से न केवल किसानों की लागत कम होगी, बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही, यह पर्यावरण के लिए भी बेहद लाभकारी साबित होगा।
मंत्री सुमित गोदारा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “इस तरह की परियोजनाएं किसानों और पशुपालकों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। जैविक खेती भविष्य की जरूरत है और हमें अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, जितेन्द्र सेवावत ने बताया कि कोफेड का लक्ष्य एक ऐसा आत्मनिर्भर ग्रामीण इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक बनें। उन्होंने कहा कि बामनवास कांकर में मिली सफलता ने संगठन का आत्मविश्वास बढ़ाया है और अब सहजसर गांव के जरिए पश्चिमी राजस्थान में जैविक परिवर्तन का नया उदाहरण स्थापित किया जाएगा।
इस परियोजना से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में कमी आने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और जल स्रोत भी सुरक्षित रहेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में महेश कुमार गुप्ता, भिराजराम जाखड़, ताराचंद सिल्ला और इमराताराम शर्मा भी शामिल थे, जिन्होंने इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
कुल मिलाकर, बीकानेर जिले का सहजसर गांव अब एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कोफेड और राज्य सरकार के सहयोग से यह परियोजना न केवल किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में भी उभरेगी।