भीलवाड़ा में चंद्र ग्रहण का असर: कई लोगों ने नहीं खेली होली, धुलंडी पर आधे बाजार खुले और मंदिरों के पट रहे बंद

Edited By Payal Choudhary, Updated: 04 Mar, 2026 12:36 PM

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राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में इस बार धुलंडी का त्योहार चंद्र ग्रहण के कारण कुछ अलग माहौल में मनाया गया। रंगों के इस पर्व पर जहां एक ओर कई लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली खेली, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए रंग और...

राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में इस बार धुलंडी का त्योहार चंद्र ग्रहण के कारण कुछ अलग माहौल में मनाया गया। रंगों के इस पर्व पर जहां एक ओर कई लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली खेली, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए रंग और गुलाल से दूरी बनाए रखी। इसी वजह से शहर में होली का उत्साह सामान्य से थोड़ा कम दिखाई दिया।

मंगलवार सुबह जब लोग धुलंडी मनाने के लिए घरों से निकले तो शहर में ग्रहण और होली का मिला-जुला असर देखने को मिला। कई परिवारों ने धार्मिक मान्यताओं के चलते रंग खेलने से परहेज किया, जबकि कुछ लोगों ने परंपरा के अनुसार रंग और गुलाल लगाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।

बाजारों में दिखा मिला-जुला माहौल

धुलंडी के दिन भीलवाड़ा के प्रमुख बाजारों में भी मिश्रित स्थिति देखने को मिली। कई बाजारों में आधे से अधिक दुकानें खुली रहीं, जबकि कुछ व्यापारियों ने चंद्र ग्रहण और रंगों के कारण अपनी दुकानें बंद रखीं।

आमतौर पर धुलंडी के दिन बाजारों में रंग, गुलाल और त्योहार की रौनक देखने को मिलती है, लेकिन इस बार ग्रहण के कारण बाजारों में सामान्य से कम भीड़ नजर आई। कई जगह लोग सीमित संख्या में ही खरीदारी करते दिखाई दिए।

व्यापारियों का कहना था कि ग्रहण और होली दोनों एक ही दिन पड़ने के कारण कई लोगों ने बाहर निकलने से परहेज किया, जिससे बाजारों की चहल-पहल अपेक्षाकृत कम रही।

मंदिरों के पट रहे बंद

चंद्र ग्रहण के कारण शहर के अधिकांश मंदिरों के पट भी बंद रखे गए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना नहीं की जाती, इसलिए सुबह से ही कई मंदिरों के दरवाजे बंद रहे।

कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए धार्मिक नियमों का पालन किया और रंगों से दूरी बनाए रखी। मंदिरों के बंद रहने से भी शहर में त्योहार का माहौल थोड़ा शांत नजर आया।

पुराने शहर में दिखा रंगों का उत्साह

हालांकि शहर के कुछ हिस्सों में होली का उत्साह पूरी तरह नजर आया। खासतौर पर पुराने भीलवाड़ा क्षेत्र में लोगों ने पारंपरिक अंदाज में रंग और गुलाल के साथ होली खेली।

यहां सुबह से ही युवाओं की टोलियां ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर निकल आईं। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और होली की बधाइयां दीं। ढोल की धुन पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया और माहौल पूरी तरह रंगीन नजर आया।

कई जगहों पर लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाते और मिठाइयां बांटते दिखाई दिए। इस क्षेत्र में होली का उल्लास साफ तौर पर देखा गया।

सामूहिक स्नेह मिलन और वाहन रैली

होली के अवसर पर शहर में कई सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सुबह चित्रकूट धाम में स्वयंसेवकों ने सामूहिक होली स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद स्वयंसेवकों ने वाहन रैली भी निकाली, जो शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों से होकर गुजरी।

इस रैली के दौरान लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया और त्योहार की खुशियां साझा कीं।

अग्रवाल उत्सव भवन में मनाई होली

शहर के अग्रवाल उत्सव भवन में भी होली का विशेष आयोजन किया गया। यहां समाज के लोगों ने भक्ति भजनों के बीच रंग, गुलाल और फूलों से होली खेली।

कार्यक्रम में युवाओं ने एक-दूसरे को रंग लगाया और त्योहार की बधाइयां दीं। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति संगीत और रंगों के साथ उत्सव का माहौल बना रहा।

ग्रहण और होली का मिला-जुला असर

कुल मिलाकर भीलवाड़ा में इस बार धुलंडी का त्योहार ग्रहण और होली दोनों के प्रभाव के साथ मनाया गया। कुछ लोगों ने धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए रंग खेलने से दूरी बनाई, जबकि कई इलाकों में लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली मनाई।

इस वजह से शहर में त्योहार का माहौल थोड़ा शांत लेकिन रंगीन भी नजर आया। कहीं बाजारों में सन्नाटा था तो कहीं ढोल की धुन पर लोग गुलाल उड़ाते दिखाई दिए।

इस तरह भीलवाड़ा में इस बार धुलंडी का पर्व आस्था और उत्साह के बीच संतुलन के साथ मनाया गया।

 

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