आवारा मवेशियों से त्रस्त किसानों का फूटा गुस्सा, अंता में नगर पालिका परिसर में बंद किए गोवंश

Edited By Anil Jangid, Updated: 21 Jan, 2026 07:40 PM

farmers protest against stray cattle menace lock cows inside anta municipal off

बारां। जिले के अंता क्षेत्र में आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। फसलों की लगातार हो रही बर्बादी और प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित किसानों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए आवारा गोवंश को नगर पालिका परिसर में...

बारां। जिले के अंता क्षेत्र में आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। फसलों की लगातार हो रही बर्बादी और प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित किसानों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए आवारा गोवंश को नगर पालिका परिसर में बंद कर दिया। इस घटनाक्रम से नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक अमले में हड़कंप फैल गया।

 

किसानों का कहना है कि आवारा सांड और गायें दिन-रात खेतों में घुसकर उनकी मेहनत पर पानी फेर रही हैं। सरसों, गेहूं और अन्य रबी फसलें इन मवेशियों की वजह से बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो नगर पालिका और न ही प्रशासन ने कोई ठोस समाधान निकाला।

 

किसानों ने आरोप लगाया कि बड़दिया क्षेत्र में नंदी गोशाला का निर्माण होने के बावजूद आवारा सांडों को वहां शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। जानबूझकर मवेशियों को खुले में छोड़ा जा रहा है, जिससे न केवल खेतों को नुकसान हो रहा है बल्कि आमजन की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। सड़कों पर सांडों की आपसी लड़ाई के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब तक कई लोग इन आवारा मवेशियों की चपेट में आकर घायल भी हो चुके हैं।

 

किसानों ने विरोध स्वरूप आसपास के इलाकों से आवारा मवेशियों को इकट्ठा किया और सीधे नगर पालिका कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने गोवंश को पालिका परिसर के भीतर बंद कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

 

बाद में नगर पालिका कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद मवेशियों को परिसर से बाहर निकाला। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही आवारा मवेशियों को गोशालाओं में भेजने और स्थायी समाधान करने की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए, ताकि उनकी फसल और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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