बारां में थमा गौ-रक्षकों का आक्रोश, CM के दखल के बाद प्रशासन ने मानी 5 मांगें!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Feb, 2026 02:36 PM

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राजस्थान के बारां जिले में गौवंश की मौत को लेकर पिछले तीन दिनों से जारी तनाव अब पूरी तरह शांत हो गया है। शहर बंद और लाठीचार्ज के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मध्यस्थता से...

राजस्थान के बारां जिले में गौवंश की मौत को लेकर पिछले तीन दिनों से जारी तनाव अब पूरी तरह शांत हो गया है। शहर बंद और लाठीचार्ज के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मध्यस्थता से प्रशासन और गौ-सेवकों के बीच सहमति बन गई है। प्रशासन ने गौ-सेवकों की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं, जिसके बाद जिले में शांति व्यवस्था बहाल हो गई है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

पूरा मामला 6 फरवरी को उस समय शुरू हुआ, जब बारां जिले में कुछ स्थानों पर गोवंश मृत अवस्था में मिला। गौ-सेवकों ने आरोप लगाया कि गोवंश के साथ लापरवाही बरती जा रही है और उनकी मौत की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही। इसी को लेकर आक्रोश बढ़ता गया और सोमवार को बारां शहर बंद का आह्वान किया गया।

शहर बंद के दौरान लाठीचार्ज, बिगड़े हालात

शुरुआत में शहर बंद शांतिपूर्ण रहा, लेकिन दोपहर बाद प्रताप चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कुछ राहगीर और बच्चे भी घायल हुए, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

CM के निर्देश पर मौके पर पहुंचे IG

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बारां-अटरू विधायक राधेश्याम बैरवा ने तत्काल मुख्यमंत्री से संपर्क किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोटा रेंज के IG राजेंद्र प्रसाद गोयल देर रात बारां पहुंचे। इसके बाद कोतवाली थाने में कलेक्टर, एसपी, भाजपा जिला अध्यक्ष और गौ-सेवकों के बीच लंबी बैठक हुई।

प्रशासन ने मानी गौ-सेवकों की 5 बड़ी मांगें

बैठक के बाद प्रशासन ने श्री वासुदेव गौ सेवा समिति की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। तय हुआ कि

  • मृत बछड़े और अन्य गोवंश की मौत की जांच अब एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी करेंगे।

  • शहर के बीच स्थित नगर परिषद का डंपिंग यार्ड शहर से बाहर शिफ्ट किया जाएगा।

  • गोवंश के शवों के सम्मानजनक निस्तारण के लिए इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाया जाएगा।

  • जिले में आवारा और बेसहारा गोवंश के लिए एक बड़ी और आधुनिक गौशाला विकसित की जाएगी।

  • घायल गोवंश को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए विधायक कोष से 15 लाख रुपये की एम्बुलेंस दी जाएगी।

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी रिहा

लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने 9 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। समझौते के बाद इन सभी को रिहा कर दिया गया है। विधायक राधेश्याम बैरवा ने स्पष्ट किया कि किसी भी गौ-सेवक के खिलाफ कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह आंदोलन गोवंश की रक्षा की भावना से जुड़ा हुआ था।

धारा 163 लागू, प्रशासन सतर्क

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर ने बारां में BNSS की धारा 163 लागू कर दी है। अब किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। पुलिस प्रशासन के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस जाब्ता अभी भी तैनात है और जिले में शांति व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

IG का बयान: निष्पक्ष जांच और इलाज पर जोर

कोटा रेंज IG राजेंद्र प्रसाद गोयल ने कहा कि पूरे मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। साथ ही घायल गोवंश के इलाज की तत्काल और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

अब आगे क्या?

बारां में हालात फिलहाल सामान्य हैं, लेकिन प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जो घोषणाएं की गई हैं, वे ज़मीन पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से लागू होती हैं। अब सभी की नजरें इन्हीं फैसलों के अमल पर टिकी हैं।

 

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