धोली मीणा ने इक्वाडोर की खतरनाक चोटी रुकु पिचिंचा पर फहराया तिरंगा

Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Jan, 2026 01:10 PM

dholi meena hoists indian flag on ecuador s dangerous rucu pichincha peak

क्विटो (इक्वाडोर)। नए साल के पहले दिन राजस्थान की साधारण बेटी धोली मीणा ने दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में एक और ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। उन्होंने 15,413 फीट (लगभग 4696 मीटर) ऊंची रुकु पिचिंचा चोटी पर पहली बार भारतीय तिरंगे को फहराया। यह चोटी...

क्विटो (इक्वाडोर)। नए साल के पहले दिन राजस्थान की साधारण बेटी धोली मीणा ने दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में एक और ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। उन्होंने 15,413 फीट (लगभग 4696 मीटर) ऊंची रुकु पिचिंचा चोटी पर पहली बार भारतीय तिरंगे को फहराया। यह चोटी पिचिंचा ज्वालामुखी का हिस्सा है और अपनी दुर्गमता व खतरनाक रास्तों के लिए जानी जाती है।

 

धोली मीणा जयपुर जिले के जमवारामगढ़ क्षेत्र के थोलाई गांव की निवासी और दौसा जिले की बहू हैं। पारंपरिक घाघरा-लुगड़ी में बड़ी हुईं धोली ने अपनी इसी सांस्कृतिक पहचान को ताकत बनाकर इस चुनौतीपूर्ण आरोहण को सफलतापूर्वक पूरा किया। वे विदेश में भारतीय और राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही चर्चित हैं।

 

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    धोली ने बताया कि 01 जनवरी 2026 को इक्वाडोर के भारतीय समुदाय के सदस्यों तथा स्थानीय मित्रों के साथ मिलकर उन्होंने इस चोटी को फतह किया। ठंडी हवाओं, दुर्गम पथ और ऊंचाई से होने वाली सांस की तकलीफ जैसी बाधाओं के बावजूद राजस्थानी जज्बे और भारतीय साथियों (खासकर उत्तराखंड मूल के भाइयों) के हौसले ने उन्हें आगे बढ़ाया। चोटी पर तिरंगा फहराते समय भावुक होकर उन्होंने कहा कि यह जीत हर उस बहन-बेटी की है जो अपनी परंपरा पर गर्व करती है और बड़े सपने देखती है।

     

    इसके अलावा, धोली मीणा की पर्वतारोहण की यात्रा में इक्वाडोर का एक और प्रमुख ज्वालामुखी कैयम्बे (Cayambe Volcano) भी शामिल रहा है। कैयम्बे इक्वाडोर की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 5,790 मीटर (लगभग 18,996 फीट) है। यह भूमध्य रेखा पर स्थित सबसे ऊंचा बिंदु है जहां बर्फ हमेशा रहती है। धोली ने इस चुनौतीपूर्ण ग्लेशियर युक्त ज्वालामुखी पर भी सफल आरोहण किया, जो उनकी फिटनेस और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। कैयम्बे की चढ़ाई तकनीकी रूप से कठिन मानी जाती है और इसके लिए विशेष तैयारी की जरूरत होती है।

     

    धोली की ये उपलब्धियां भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक हैं। वे पहले भी विदेशी धरती पर राजस्थानी परंपराओं को जीवंत रखने और विभिन्न पर्वतों पर तिरंगा फहराने के लिए सुर्खियां बटोर चुकी हैं। इससे पहले फ़रवरी 2024 में यूरोप के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी माउंट एटना पर भी तिरंगा फहराया था। उनका संदेश सभी बहनों-बेटियों के लिए है: अपनी संस्कृति को कमजोरी नहीं, शान समझो और सपनों की सबसे ऊंची चोटियां फतह करो!

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