Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jan, 2026 03:58 PM

भीनमाल (जालोर)। राजस्थान के जालोर जिले के भीनमाल क्षेत्र से सामाजिक कुरीतियों को उजागर करने वाला एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां समाज के कथित पंचों ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए एक निर्दोष परिवार को समाज से पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया।...
भीनमाल (जालोर)। राजस्थान के जालोर जिले के भीनमाल क्षेत्र से सामाजिक कुरीतियों को उजागर करने वाला एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां समाज के कथित पंचों ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए एक निर्दोष परिवार को समाज से पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया। पीड़ित परिवार पर न केवल हुक्का-पानी बंद किया गया, बल्कि उस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी थोप दिया गया है। इस फैसले से डरा-सहमा परिवार अब पुलिस और प्रशासन की शरण में पहुंचा है।
पीड़ित पांचाराम माली, निवासी भीनमाल, ने बताया कि उसके साले के कथित सामाजिक अपराध की सजा उसे और उसके पूरे परिवार को भुगतनी पड़ रही है। पांचाराम के अनुसार उसका साला पहले से शादीशुदा था और समाज की ही एक महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। इस व्यक्तिगत मामले को आधार बनाकर समाज के पंचों ने फरमान सुनाया कि उसका साला अब उनके घर नहीं आ सकता। लेकिन इसके साथ ही बिना किसी वैधानिक अधिकार के पूरे परिवार को समाज से बाहर कर दिया गया।
हुक्का-पानी बंद, सामाजिक बहिष्कार
पांचाराम का आरोप है कि समाज के पंचों ने उसके खिलाफ हुक्का-पानी बंद करने का आदेश जारी कर दिया। समाज के लोगों को निर्देश दिए गए कि वे न तो उसके घर जाएं, न उससे बातचीत करें और न ही किसी प्रकार का लेन-देन रखें। यहां तक कहा गया कि जिन दुकानदारों की दुकानें समाज से जुड़ी हैं, वे पीड़ित परिवार को राशन, दूध और जरूरी सामान तक न दें।
धमकियां और दुकान खाली कराने का दबाव
पीड़ित ने बताया कि समाज के 5 से 7 लोग लगातार उसे धमकियां दे रहे हैं। परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है। जिन दुकानों को पांचाराम ने किराए पर ले रखा है, उन्हें भी खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि उसने आदेश नहीं माना तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पुलिस में मामला दर्ज, जांच शुरू
डर और असुरक्षा के बीच पांचाराम अपने परिवार के साथ जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश हुआ और पूरी घटना बताई। इसके बाद भीनमाल थाने में समाज के पंचों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि समाज के नाम पर जारी किए जा रहे ऐसे अवैधानिक और अमानवीय फरमान लोकतंत्र और कानून के खिलाफ हैं। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि आधुनिक समाज में भी तुगलकी सामाजिक फैसलों की जड़ें कितनी गहरी हैं।