Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Feb, 2026 06:14 PM

अजमेर : पुष्कर के नए मेला मैदान में मंगलवार को व्यास पीठ से हनुमंत कथा सुनाते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रेम भक्ति के पांच लक्षण बताए। कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अजमेर : पुष्कर के नए मेला मैदान में मंगलवार को व्यास पीठ से हनुमंत कथा सुनाते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रेम भक्ति के पांच लक्षण बताए। कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। शास्त्री ने कहा कि प्रेम भक्ति का पहला लक्षण है – भगवान को मांगना। दूसरा लक्षण है निरंतर भगवान का स्मरण। उन्होंने कहा कि साधक को केवल भगवान से ही प्रेम करना चाहिए। उदाहरण देते हुए बोले, “जैसे पानी में डूबोगे तो मृत्यु निश्चित है, वैसे ही भगवान की भक्ति में डूबोगे तो मुक्ति निश्चित है।”
प्रेम भक्ति का तीसरा लक्षण उन्होंने भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण बताया। चौथा लक्षण बताते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं, उन्हें आडंबर नहीं, सच्चा भाव प्रिय है। पांचवां लक्षण अनन्य भाव है। उनके अनुसार, सच्चे और निष्कपट भाव से की गई भक्ति से भगवान प्रसन्न होते हैं।
हनुमान और भगवान राम के प्रेम का उल्लेख करते हुए शास्त्री ने कहा कि रामकथा सुनने के रसिक हनुमानजी हैं और हनुमान कथा सुनने स्वयं राम आते हैं। उन्होंने भक्त और परम भक्त के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो भगवान से कुछ मांगता है वह भक्त है, लेकिन जो भगवान को ही मांग ले, वह परम भक्त होता है।
कथा के दौरान उन्होंने सिख गुरुओं के बलिदान का भी उल्लेख किया। गुरु तेग बहादुर के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कश्मीरी पंडितों की रक्षा के प्रसंग का जिक्र किया और “जो बोले सो निहाल” का जयकारा लगाया।
पुष्कर के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह तीर्थों का गुरु है और पंचतीर्थों में इसकी विशेष महत्ता है। यहां शिव, विष्णु और ब्रह्मा तत्व का वास बताया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चार धाम की यात्रा के साथ पुष्कर अवश्य आएं।
व्यास पीठ से उन्होंने पुष्कर में मठ बनाने की इच्छा भी व्यक्त की। साथ ही कहा कि यदि समर्थ शिष्य मिले तो वे कैंसर अस्पताल स्थापित कराने का संकल्प भी पूरा करेंगे। कथा के अंत में भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।